चांदनी बिहार पुर से लाल बहादुर यादव की रिपोर्ट :–
जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग कि मली भगत से औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था आईटीआई स्कूल खोल के पैसे कमाने का बनाये है जडिया विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रही है खिलवाड जिले के दूरस्थ क्षेत्र चांदनी बिहार पुर औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था आईटीआई स्कूल में नहीं मनाई गई सरस्वती जी का पूजा गौरतल की बात तो यह है कि विद्यार्थियों का बसंत पंचमी का दिन सबसे बड़ा श्रेष्ठ माना जाता है उसी दिन विद्यार्थी अपने उज्जवल भविष्य के बारे में माताजी से पूजा अर्चना कर प्रार्थना करते हैं|
विद्यार्थियों का पहला मंदिर विद्यालय होता है लेकिन आज के दिन उसी मंदिर मेंअंधकार छाया हुआ है विद्यार्थी बाहर करते रहे इंतजार मगर दिन भर से नहीं खुला ताला मिली जानकारी के अनुसार वर्तमान में पूरे संस्थान की जिम्मेदारी एकल शिक्षक लक्ष्मी नेताम पर सौपी गई है पर आज बसंत पंचमी के दिन भी उपस्थित नहीं रही जिस कारण सरस्वती माता का पूजा नहीं की गई
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विद्यार्थी शिक्षक नियुक्ति की मांग को लेकर लगातार लगा रहे हैं गुहार पर नहीं ले रहे हैं कोई संज्ञान आपको बता दे की मिली जानकारी के अनुसारऔद्योगिक प्रशिक्षण संस्था आईटीआई स्कूल चांदनी में अभी की स्थिति में कुल 14 विद्यार्थियों की उपस्थिति हैं जिसमें एक भी शिक्षक नियुक्ति नहीं की गई है अतिथि के रूप में एक शिक्षिका है भी तो उनकी भी उपस्थित नहीं रहती है|
आज बसंत पंचमी के दिन भी उपस्थित नहीं रही विद्यार्थी शिक्षक नियुक्ति करने को लेकर दर-दर भटक रहे हैं आवाज लगा रहे हैं आवेदन दे दे कर तरस्त हो गये है पर कोई सुनने वाला नहीं जानकारी के अनुसार ऐसा कोई विभाग नहीं बचा है जहां विद्यार्थी अपने उज्जवल भविष्य बनाने के लिए शिक्षक नियुक्ति लेकर गुहार ना लगाएं हो |
आपको बता दे की आवेदन की तिथि 3.10.2025 संयुक्त निदेशक के पास बस आश्वासन मिला 8 .10 .2025 उप मंडल दंडाधिकारी बस मिला आश्वासन 4/11/2025 जिला अधिकारी बस मिला आश्वासन यहां तक की 7.11.2025 महिला एवं बाल विकास मंत्री छत्तीसगढ़ शासन तक को आवेदन दी गई इसके बाद भी कोई प्राचार्य की नियुक्ति नहीं की गई इससे स्पष्ट पता चलता है जिला प्रशासन एवं जिलाधिकारी कि मिली भगत से यह संस्था सिर्फ इसलिए खोला गया है|
कि इस संस्था का पैसे को बंदर बांट कर सके विद्यार्थियों का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी जिला प्रशासन द्वारा जल्द से जल्द प्राचार्य नियुक्ति कराया जाए या तो औद्योगिक प्रशिक्षण संस्था को ही बंद किया जाए ताकि हम विद्यार्थियों का उज्जवल भविष्य खराब होने से बच्चे ना रहेगी बास ना बजेगी बांसुरी




