अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर | सरकार जहां युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कौशल विकास योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं रतनपुर स्थित महामाया आईटीआई इन योजनाओं पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। ज़मीनी हकीकत यह है कि यह संस्थान आज “भूतिया आईटीआई” बन चुका है—जहां न छात्र दिखते हैं, न प्रशिक्षण, न ही किसी तरह की शैक्षणिक गतिविधि।
लेकिन कागज़ों में यही संस्थान वर्षों से पूरी क्षमता के साथ संचालित बताया जा रहा है।
छात्र नहीं, फिर प्रशिक्षण किसे?
स्थानीय नागरिकों और आसपास के रहवासियों के अनुसार, आईटीआई परिसर में महीनों से कोई नियमित कक्षा नहीं लगी। वर्कशॉप में मशीनें धूल फांक रही हैं और परिसर में दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है।
इसके बावजूद हर सत्र में दाखिले, उपस्थिति रजिस्टर, प्रशिक्षण पूर्ण होने की रिपोर्ट और परीक्षा संबंधी दस्तावेज़ नियमित रूप से तैयार किए जा रहे हैं।
यह सवाल अब आमजन की ज़ुबान पर है—
जब छात्र ही नहीं, तो प्रशिक्षण किसे दिया जा रहा है?
निरीक्षण या सिर्फ फाइलों की खानापूर्ति?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने वर्षों से यह संस्थान मान्यता प्राप्त है।
सूत्रों का दावा है कि निरीक्षण के नाम पर अधिकारी केवल फाइलें देखकर औपचारिकता निभा देते हैं।
ज़मीनी सत्यापन, छात्रों से संवाद या कक्षाओं की वास्तविक स्थिति जानने की कोई गंभीर कोशिश नहीं की जाती।
अनुदान और संसाधनों में भारी गड़बड़ी की आशंका
यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होती है, तो—
प्रशिक्षण मद में मिले सरकारी अनुदान
उपकरणों व संसाधनों की खरीदी
स्टाफ की नियुक्ति और वेतन
फर्जी उपस्थिति और परीक्षा रिकॉर्ड
जैसे कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।
यह सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ सीधा छल और सरकार की मंशा का मज़ाक है।
युवाओं के सपनों से खिलवाड़
आईटीआई जैसे संस्थान ग्रामीण और कस्बाई युवाओं के लिए रोजगार की उम्मीद होते हैं।
लेकिन जब वही संस्थान कागज़ों तक सीमित रह जाएं, तो यह पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करता है।
अब उठ रही है जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि—
महामाया आईटीआई रतनपुर की उच्चस्तरीय जांच हो
वास्तविक छात्रों और प्रशिक्षण की स्थिति सार्वजनिक की जाए
दोषी अधिकारियों और प्रबंधन पर कड़ी कार्रवाई हो
बुलंद टाइम न्यूज़ इस मामले पर नज़र बनाए हुए है।
आने वाले दिनों में परत दर परत खुलासे किए जाएंगे—सच्चाई सामने लाने तक यह सिलसिला जारी रहेगा।





