
मस्तूरी/मल्हार। ऐतिहासिक नगरी मल्हार एक बार फिर राजनीतिक विवाद और हंगामे का केंद्र बन गई है। मल्हार महोत्सव की तैयारियों को लेकर बुलाई गई बैठक उस समय अखाड़े में तब्दील हो गई जब नगर पंचायत अध्यक्ष धनेश्वरी केंवट ने अपनी ही पार्टी के नेता और नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील चौबे को सबके सामने थप्पड़ मार दिया। यह घटना उस समय हुई जब बैठक में एसडीएम और जनपद पंचायत के सीईओ समेत कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। अचानक हुई इस घटना से बैठक में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और प्रशासनिक गलियारों में भी हलचल मच गई।
बताया जा रहा है कि मल्हार के विश्राम गृह में आयोजित इस बैठक का उद्देश्य आगामी मल्हार महोत्सव की तैयारियों और जिम्मेदारियों का निर्धारण करना था। लेकिन चर्चा के दौरान मतभेद इतना बढ़ गया कि मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
अफसरों के सामने हुआ हाई वोल्टेज ड्रामा
मल्हार महोत्सव के आयोजन को लेकर आयोजित इस बैठक में उस समय तनाव बढ़ गया जब पुराने आयोजक दल से जुड़े सोनू तिवारी को किसी प्रकार की जिम्मेदारी न देने की बात सामने आई। जानकारी के अनुसार नगर पंचायत के लगभग 90 प्रतिशत पार्षद और कई स्थानीय लोग सोनू तिवारी को आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका देने के पक्ष में थे।
सूत्रों के मुताबिक नगर पंचायत अध्यक्ष धनेश्वरी केंवट चाहती थीं कि इस बार महोत्सव का पूरा आयोजन उनके और उनके समर्थकों के नेतृत्व में ही हो। इसी बात को लेकर बैठक में तीखी बहस शुरू हो गई।
इसी दौरान जब नगर पंचायत उपाध्यक्ष सुशील चौबे ने अपनी बात रखने की कोशिश की तो दोनों पक्षों के बीच बहस बढ़ गई। देखते ही देखते स्थिति इतनी बिगड़ गई कि अध्यक्ष ने आपा खोते हुए सबके सामने चौबे को थप्पड़ मार दिया। घटना के वक्त मौजूद प्रशासनिक अधिकारी स्थिति को संभालने की कोशिश करते रहे, लेकिन कुछ समय तक बैठक में हंगामे का माहौल बना रहा।
पार्षद को भी पीटने का प्रयास
बैठक के दौरान विवाद केवल उपाध्यक्ष तक ही सीमित नहीं रहा। बताया जाता है कि नगर पंचायत मल्हार के वार्ड क्रमांक 5 के एक पार्षद के साथ भी कहासुनी हो गई, जिसके बाद अध्यक्ष ने उन्हें भी मारने का प्रयास किया। हालांकि पार्षद के कड़े रुख को देखते हुए स्थिति और ज्यादा नहीं बिगड़ी और अध्यक्ष पीछे हट गईं।
पहले भी विवादों में रह चुकी हैं अध्यक्ष
यह पहला मौका नहीं है जब नगर पंचायत अध्यक्ष धनेश्वरी केंवट विवादों में आई हैं। इससे पहले भी वह और उनके पति धनेश्वर केंवट कई मामलों को लेकर चर्चा में रह चुके हैं। कुछ समय पहले एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें अध्यक्ष पर नगर पंचायत के मुख्य नगरपालिका अधिकारी (सीएमओ) के साथ गाली-गलौज करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगे थे। उस समय भी विवाद की जड़ कमीशनखोरी और पैसों के लेन-देन को बताया गया था।
विवाद के पीछे तीन बड़ी वजहें
1. 20 लाख का बजट:
शासन द्वारा इस वर्ष मल्हार महोत्सव के आयोजन के लिए लगभग 20 लाख रुपये की राशि जारी की गई है। इस बजट को खर्च करने और विभिन्न कार्यों के ठेके देने को लेकर अंदरखाने खींचतान चल रही है।
2. वर्चस्व की लड़ाई:
नगर पंचायत अध्यक्ष और उनके समर्थक अपने स्तर पर महोत्सव का संचालन करना चाहते हैं, जबकि उपाध्यक्ष और पुरानी आयोजन टीम—जिसे स्थानीय स्तर पर अनुभव हासिल है—उन्हें भी जिम्मेदारी देने की मांग कर रही है।
3. राजनीतिक संरक्षण और गुटबाजी:
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अध्यक्ष को जिले के एक प्रभावशाली पदाधिकारी और स्थानीय नेता राजकुमार वर्मा का संरक्षण प्राप्त है। बताया जाता है कि राजकुमार वर्मा पहले भी विवादों में रह चुके हैं और एक वर्ष पूर्व एक स्थानीय विधायक को अपशब्द कहने के मामले में उन्हें पार्टी से निष्कासित किया गया था। हालांकि बाद में गुटबाजी और अंदरूनी समीकरणों के चलते वह फिर से संगठन में पदाधिकारी बन गए।
सूत्रों के अनुसार उनके खिलाफ आपराधिक मामले भी दर्ज हैं और कुछ मामलों में वह फरार बताए जा रहे हैं, लेकिन अब तक कड़ी कार्रवाई नहीं होने से क्षेत्र में उनकी दबंगई को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं।
प्रशासन पर भी उठे सवाल
घटना के दौरान एसडीएम और जनपद पंचायत के सीईओ सहित कई अधिकारी मौजूद थे, लेकिन उनके सामने हुई इस घटना ने प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बैठक में मौजूद अधिकारी तत्काल हस्तक्षेप करते तो स्थिति इतनी ज्यादा नहीं बिगड़ती।
क्षेत्र में चर्चा का विषय बना मामला
नगर पंचायत की बैठक में हुई इस घटना के बाद मल्हार सहित पूरे मस्तूरी क्षेत्र में यह मामला चर्चा का विषय बन गया है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व वाले मल्हार महोत्सव की तैयारी बैठक में इस तरह का विवाद होना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।
अब देखना होगा कि प्रशासन और राजनीतिक दल इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं और महोत्सव की तैयारियां किस तरह आगे बढ़ती हैं।



