रतनपुर। सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को समय पर और बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिलासपुर पुलिस द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए सोमवार को पुलिस लाइन बिलासपुर में पीएम-राहत योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम पुलिस उप महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह के निर्देशन में संपन्न हुआ, जिसमें पुलिस विभाग, जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना के बाद “गोल्डन ऑवर” के भीतर पीड़ितों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना तथा उन्हें आर्थिक बोझ से राहत दिलाना था। प्रशिक्षण में उपस्थित अधिकारियों को योजना के हर पहलू से अवगत कराया गया, ताकि दुर्घटना के समय किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी न हो।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान अधिकारियों एवं कर्मचारियों को टीएमएस 2.0 (Traffic Management System), iRAD (Integrated Road Accident Database) और eDAR (Electronic Detailed Accident Report) जैसे आधुनिक पोर्टलों पर दुर्घटना पीड़ितों के पंजीयन, डेटा एंट्री और केस प्रोसेसिंग की पूरी प्रक्रिया विस्तारपूर्वक समझाई गई। इस अवसर पर NIC (नेशनल इन्फॉर्मेटिक्स सेंटर) के विशेषज्ञों ने ऑनलाइन सिस्टम के तकनीकी पहलुओं, डेटा अपलोडिंग, रिपोर्टिंग और मॉनिटरिंग की जानकारी भी साझा की।
इस योजना के अंतर्गत जिले में पहला सफल पंजीयन थाना रतनपुर क्षेत्र के एक सड़क दुर्घटना पीड़ित का किया गया, जिसे तत्काल बिलासपुर स्थित आरोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया था। पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी आवश्यक ऑनलाइन प्रक्रियाएं पूर्ण कर केस दर्ज किया, जिससे पीड़ित को बिना किसी आर्थिक बाधा के कैशलेस इलाज की सुविधा प्राप्त हो सकी।
योजना के प्रावधानों के अनुसार, सड़क दुर्घटना में घायल किसी भी व्यक्ति को दुर्घटना की तिथि से 7 दिनों तक अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक का निःशुल्क कैशलेस उपचार उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए यह अनिवार्य है कि घायल व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर अस्पताल में भर्ती कराया जाए तथा संबंधित पोर्टल पर उसका पंजीयन किया जाए।
जिला प्रशासन के अनुसार, इस योजना को प्रभावी बनाने के लिए जिले के आयुष्मान भारत योजना से जुड़े अस्पतालों सहित कुल 172 अस्पतालों को इसमें शामिल किया गया है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
अधिकारियों ने बताया कि यह योजना न केवल दुर्घटना पीड़ितों के लिए जीवन रक्षक साबित होगी, बल्कि सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम भी है। इससे दुर्घटना के बाद इलाज में होने वाली देरी और आर्थिक समस्याओं को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
कार्यक्रम के अंत में अधिकारियों से अपेक्षा की गई कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में इस योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करें, ताकि आम नागरिक भी इसके लाभ और प्रक्रिया से भली-भांति परिचित हो सकें तथा जरूरत पड़ने पर समय पर इसका लाभ उठा सकें।





