बुलंद टाइम्स के लिए जिला रब्यूरो चीफ रायपुर अनीश मिश्रा की रिपोर्ट
छत्तीसगढ़ में जबरन, प्रलोभन या दबाव के माध्यम से कराए जा रहे धर्मांतरण पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार द्वारा लाया गया धर्म स्वातंत्र्य कानून 2026 अब पूरे प्रदेश में लागू हो गया है। यह कानून 19 मार्च को विधानसभा में पारित होने के बाद राज्यपाल की मंजूरी एवं राजपत्र में प्रकाशन के पश्चात प्रभावी हुआ।
इस नए कानून का उद्देश्य नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना और अवैध तरीके से किए जा रहे धर्मांतरण पर सख्ती से रोक लगाना है।
⚖️ कड़े दंड का प्रावधान
कानून में अवैध धर्मांतरण को गंभीर अपराध माना गया है—
सामान्य मामलों में 7 से 10 वर्ष तक की सजा
महिलाओं, नाबालिगों और अनुसूचित जाति/जनजाति के मामलों में 10 से 20 वर्ष तक की सजा
सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास तक का प्रावधान
लाखों रुपये तक का जुर्माना भी तय
📝 धर्म परिवर्तन के लिए नई प्रक्रिया
अब किसी भी व्यक्ति को धर्म परिवर्तन करने से पहले शासन को सूचना देना अनिवार्य होगा।
निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किया गया धर्म परिवर्तन अवैध माना जाएगा।
🚫 इन परिस्थितियों में होगा अपराध
लालच या आर्थिक प्रलोभन देकर
डर, दबाव या धमकी देकर
धोखे या गलत जानकारी देकर
विवाह के माध्यम से धर्म परिवर्तन कराने पर
🏛️ सरकार का पक्ष
राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून जबरन धर्मांतरण को रोकने और सामाजिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। हालांकि कुछ संगठनों द्वारा इस पर आपत्ति भी जताई गई है।
📌 निष्कर्ष
यह कानून स्पष्ट करता है कि स्वेच्छा से धर्म परिवर्तन की स्वतंत्रता बनी रहेगी, लेकिन किसी भी प्रकार के दबाव, लालच या धोखे से किया गया धर्मांतरण अब सख्त अपराध की श्रेणी में आएगा।



