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दूर दूर से पहुंचेंगे श्रद्धालु बोल कालिया के नारों से गूंजेगा अमलीपदर।
बुलंद टाइम्स न्यूज, गरियाबंद। अमलीपदर तहसील मुख्यालय के सिद्ध जगन्नाथ मंदिर में प्रतिवर्ष रथ-यात्रा का आयोजन बड़े ही धूमधाम और भव्य तरीके से किया जाता है. यह उत्सव इस क्षेत्र का प्रमुख धार्मिक उत्सव है, जिसमें हजारों स्थानीय एवं आसपास क्षेत्र से आए श्रद्धालु बड़े ही श्रद्धा भाव से प्रभु श्री जगन्नाथ भगवान के रथ खींचते हैं और धार्मिक अनुष्ठानों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं. रथों का त्योहार कहलाने वाला यह उत्सव भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की जगन्नाथ मंदिर से गुंडिचा मंदिर तक की भव्य शोभायात्रा का प्रतीक है और इसी आस्था के पर्व के बीच अमलीपदर का भव्य रथ-यात्रा प्रदेश भर में साल दर साल विख्यात होते जा रहा है. पिछले कई सालों से अमलीपदर में मनाए जाने वाले इस पर्व में श्रद्धालुओं की संख्या हर वर्ष के अनुसार हर वर्ष बढ़ती जा रही है, साथ ही छत्तीसगढ़ प्रदेश एवं महाराष्ट्र, दिल्ली, मध्य प्रदेश, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश सहित कई राज्यों के श्रद्धालु शामिल होते हैं. इस बार भी अमलीपदर के रथ यात्रा में प्रदेश सहित दूसरे प्रदेशों से हजारों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. सिद्ध जगन्नाथ मंदिर अमलीपदर के पुजारी एवं राष्ट्रीय कथा-वाचक आचार्य श्री युवराज पांडे ने बताया कि सिद्ध जगन्नाथ मंदिर में रथ-यात्रा के महापर्व का शुभारंभ हो चुका है अमलीपदर जगन्नाथ मंदिर में 108 घड़े के जल से महा-स्नान के बाद महाप्रभु बीमार हैं. शाही स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ के बीमार पड़ने की अवधि को ‘गुप्त-काल’ और ‘आनासार’ कहा जाता है, इस दौरान भगवान को एकांत में रखा जाता है और भक्तों को उनके दर्शन की अनुमति नहीं होती है. इस अवधि के दौरान भगवान श्री जगन्नाथ का उपचार विशेष औषधिय लेप के साथ-साथ तुलसी के लेप से किया जाता है. ‘आनासार’ या ‘गुप्त-काल’ समाप्त होने के बाद 16 जुलाई को पूरे धूमधाम से भगवान जगन्नाथ की रथ-यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें वह अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलभद्र के साथ अपनी मौसी के घर जाएंगे. अमलीपदर में विशाल रथ यात्रा का आयोजन होगा एवं अमलीपदर में धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला भी लगातार आयोजित होती रहेगी. जिसमें राज्य भर के श्रद्धालु समेत आसपास के राज्यों के श्रद्धालु भी शामिल होंगे।




