रिपोर्ट – योगेश्वर साहू
छुरा। ग्राम पंचायत मडेली से पंचायत राज व्यवस्था को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहां सरपंच अशोक कुमार ध्रुव और सचिव अंबिका सोनी के कार्यकाल में करीब 9 लाख 25 हजार 455 रुपये की वित्तीय अनियमितता जांच में पकड़ी गई है। चौंकाने वाली बात ये है कि जिला पंचायत गरियाबंद ने 30 अप्रैल 2026 को ही सरपंच के खिलाफ धारा 40 के तहत कार्रवाई के लिए एसडीएम छुरा को पत्र भेज दिया था, लेकिन 6 महीने बाद भी फाइल धूल खा रही है।
जिला पंचायत द्वारा कराई गई जांच में परत दर परत घोटाले का खुलासा हुआ है। सबसे बड़ा मामला अटल डिजिटल सुविधा केंद्र भवन का है। इस भवन के लिए 17 जून 2025 को 5 लाख रुपये की प्रशासकीय स्वीकृति मिली और 30 जून को कार्यादेश जारी हुआ। इसके बाद जुलाई, अगस्त और सितंबर 2025 में तीन बार में 2 लाख रुपये की पहली किस्त निकाल ली गई। लेकिन जांच टीम जब मौके पर पहुंची तो 8 महीने बाद भी निर्माण शुरू ही नहीं हुआ था। पंचायत प्रस्ताव, कार्य की फाइल और दस्तावेज तक टीम को नहीं दिखाए गए। जांच टीम ने इस पूरी राशि को वसूली योग्य माना है।
इसी तरह साप्ताहिक बाजार नीलामी में 77 हजार रुपये की बोली लगी। इसमें से 67 हजार रुपये सरपंच ने नगद ले लिए और पंचायत निधि में जमा नहीं किए। 5 तालाबों की नीलामी से मिले 37 हजार 150 रुपये का भी यही हाल है। गांव के 753 परिवारों से मकान और प्रकाश कर के नाम पर 150 रुपये प्रति परिवार के हिसाब से 1 लाख 12 हजार 950 रुपये वसूले गए, लेकिन वो पैसा भी पंचायत खाते में नहीं पहुंचा। इन तीनों मदों की कुल 2 लाख 17 हजार 100 रुपये की राशि सरपंच से अलग से वसूली की अनुशंसा की गई है।
इसके अलावा 15वें वित्त आयोग के तहत 19 कार्यों के नाम पर 2 लाख 81 हजार 755 रुपये खर्च दिखाया गया है, लेकिन इन कार्यों का कोई पंचायत प्रस्ताव, ग्रामसभा अनुमोदन, बिल-वाउचर और भौतिक सत्यापन तक नहीं है। 22 हजार रुपये मानदेय और मूलभूत मद के 2 लाख 4 हजार 600 रुपये के आहरण पर भी गंभीर सवाल उठे हैं। इन मदों में कुल 7 लाख 8 हजार 355 रुपये को सरपंच और सचिव की संयुक्त जिम्मेदारी मानते हुए दोनों से बराबर-बराबर 3 लाख 54 हजार 177.50 रुपये की वसूली की अनुशंसा की गई है। इस तरह बाजार, तालाब और कर की राशि जोड़कर सरपंच पर कुल 5 लाख 71 हजार 277.50 रुपये और सचिव पर 3 लाख 54 हजार 177.50 रुपये की वसूली बनती है।
जब इस मामले में एसडीएम छुरा विशाल महाराणा से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मामला आया है, यह न्यायिक प्रक्रिया है, इसमें पेशी होती है, कार्यदिवस में छुरा आकर देखेंगे और नियमानुसार कार्रवाई करेंगे। वहीं जिला पंचायत गरियाबंद के सीईओ प्रखर चंद्राकर ने कहा कि प्रकरण का वर्तमान स्टेटस पता कर जानकारी लेता हूं, प्रकरण एसडीएम के यहां चल रहा है।
अब सवाल ये उठ रहा है कि जब जांच में घोटाला साफ है और धारा 40 के तहत पद से हटाने की अनुशंसा हो चुकी है, तो कार्रवाई में इतनी देरी क्यों। क्या इस दौरान पंचायत में फिर से राशि का आहरण हुआ है, और 9 लाख से ज्यादा की राशि की वसूली कब तक होगी। अब पूरे गांव की नजर एसडीएम न्यायालय की अगली सुनवाई पर टिकी है।




