बांकीमोंगरा (कोरबा)। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में मंगलवार को उस समय असहज स्थिति उत्पन्न हो गई, जब कोरबा लोकसभा क्षेत्र की सांसद ज्योत्सना चरणदास महंत के प्रतिनिधि प्रदीप अग्रवाल ने कार्यालय में पहुंचकर कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार किया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला तूल पकड़ गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अग्रवाल ने न केवल कर्मियों को अपशब्द कहे, बल्कि कार्यालयीन मर्यादाओं को ताक पर रखते हुए महिला स्टाफ के साथ भी दुर्व्यवहार किया। उपस्थितजनों ने बताया कि वे अपनी बात मनवाने के लिए दबाव की भाषा का प्रयोग कर रहे थे।
वीडियो बना गवाह, बोले– ‘‘मैं नेतागिरी यही करूंगा’’
घटना का जो वीडियो सामने आया है उसमें सांसद प्रतिनिधि का उग्र रूप स्पष्ट देखा जा सकता है। वीडियो में वे कहते सुने जा सकते हैं—
“मैं नेतागिरी यही करूंगा…”
उनका यह वक्तव्य अब नगरभर में चर्चा का विषय बन चुका है। जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे शांति, संयम और विवेक से कार्य करें, किंतु इस प्रकरण ने जनप्रतिनिधित्व की गरिमा पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।
कर्मचारियों में रोष, बोले – भय के वातावरण में नहीं होगा कार्य
नगरपालिका के कर्मचारियों ने कहा कि यह व्यवहार निंदनीय ही नहीं, बल्कि सरकारी कार्यों में हस्तक्षेप और शासकीय सेवकों को भयभीत करने का प्रयास है। एक कर्मचारी ने कहा—
“हम सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बावजूद ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं, ऐसे में जब कोई प्रतिनिधि इस प्रकार का व्यवहार करता है, तो हमारा मनोबल टूटता है।”
महिला कर्मचारी के सम्मान पर सीधा प्रहार
सूत्रों के अनुसार, सांसद प्रतिनिधि ने महिला कर्मचारी सुषमा निराला से भी अनुचित भाषा में संवाद किया, जो कि न केवल महिला सम्मान के विरुद्ध है, बल्कि कार्यस्थल पर महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को भी चुनौती देता है। इस प्रकार की घटनाएं कार्य संस्कृति को दूषित करती हैं।
स्थानीय जनता ने भी जताया आक्रोश
नगर के जागरूक नागरिकों ने इस घटना को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया और कहा कि यदि जनप्रतिनिधि ही अपने अधिकारों का दुरुपयोग करेंगे, तो आम जनता न्याय की उम्मीद किससे करेगी। एक नागरिक ने कहा—
“अगर नेता दफ्तरों में घुसकर कर्मचारियों को अपशब्द कहेंगे, तो फिर लोकतंत्र और कानून व्यवस्था का क्या औचित्य रह जाएगा?”
प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
इस पूरे घटनाक्रम के पश्चात प्रशासनिक निष्क्रियता भी सवालों के घेरे में है। अब तक न तो कोई स्पष्ट बयान आया है, न ही इस पर कोई दंडात्मक कार्रवाई की गई है। लोग पूछ रहे हैं—
क्या सांसद प्रतिनिधि को सरकारी दफ्तर में इस प्रकार दुर्व्यवहार करने का विशेषाधिकार प्राप्त है?
क्या यह घटना सेवा नियमों और आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है?
क्या प्रशासन ऐसे कृत्यों पर मौन रहकर परोक्ष समर्थन दे रहा है?
जनता की माँग — हो त्वरित कानूनी कार्रवाई
नगरपालिका कर्मचारी संघ, महिला संगठनों और नागरिक मंचों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रदीप अग्रवाल के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज की जाए तथा सांसद प्रतिनिधि पद से उन्हें तत्काल हटाया जाए। ऐसी घटनाएं यदि रोकी नहीं गईं तो यह परिपाटी बन सकती है और शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली बाधित हो सकती है।
समापन टिप्पणी
इस प्रकार की घटनाएं केवल व्यक्तियों को नहीं, बल्कि संस्थाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी चोट पहुँचाती हैं। यह आवश्यक हो गया है कि जनप्रतिनिधियों को उनके कर्तव्यों और मर्यादाओं की याद दिलाई जाए, जिससे कि शासन व्यवस्था में विश्वास बना रहे और कर्मचारियों को भयमुक्त वातावरण मिल सके।
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