
अमित दुबे की रिपोर्ट :-
बिलासपुर। प्रदेश में भूमि पंजीकरण की आधुनिक और सुरक्षित मानी जाने वाली प्रक्रिया के बावजूद, भूमाफिया अब भी किसानों की जमीनों पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा करने से नहीं चूक रहे। कूट रचित दस्तावेज़, फर्जी आम मुख्तियार और नकली आधार कार्ड के सहारे जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण कराने का खेल खुलेआम जारी है। ताजा मामला रतनपुर थाना क्षेत्र से सामने आया है, जहां एक किसान की करीब 1 एकड़ कृषि भूमि को शातिर जालसाजों ने मिलीभगत से अपने नाम दर्ज करा लिया।
पीड़ित किसान ने इस मामले की शिकायत बिलासपुर एसपी कार्यालय में दर्ज कराई है, जिसके बाद जल्द ही आरोपियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की संभावना है।
मामला क्या है?
मिली जानकारी के अनुसार, ग्राम कोरबी (तहसील बेलतरा) अंतर्गत खसरा क्रमांक 47/5/क, रकबा 0.4050 हेक्टेयर कृषि भूमि राजस्व अभिलेखों में कांजीपानी निवासी राधेलाल गंधर्व के नाम दर्ज थी। किसान राधेलाल इस जमीन पर लंबे समय से खेती करते आ रहे थे। हाल ही में, किसान पेंशन निधि का लाभ लेने के लिए उन्होंने च्वाइस सेंटर से वर्तमान बी-1 निकाला, तो वे हैरान रह गए— दस्तावेज़ में उनकी जमीन कौशल कुमार कश्यप (निवासी रतनपुर) के नाम दर्ज हो चुकी थी।
कैसे हुआ फर्जीवाड़ा?
जांच में सामने आया कि रवि कुमार इंदुवा नामक व्यक्ति ने फर्जी आम मुख्तियार के जरिए यह जमीन कौशल कश्यप को बेच दी। किसान राधेलाल का कहना है कि वे न तो इस व्यक्ति को जानते हैं और न ही कभी जमीन बेचने का सौदा किया।
राधेलाल ने बताया कि वर्ष 2021 में उन्होंने कौशल कश्यप को जाति प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अपना आधार कार्ड और ऋण पुस्तिका दी थी। उन्हें अब संदेह है कि इन्हीं दस्तावेजों का दुरुपयोग कर कौशल कश्यप ने अपने साथियों के साथ मिलकर रजिस्ट्री और नामांतरण करा लिया।
आधार कार्ड में भी गड़बड़ी
इस पूरे फर्जीवाड़े में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रजिस्ट्री दस्तावेज़ में जिस आधार कार्ड की प्रति लगाई गई है, उसका नंबर (4264 3939 6250) असल में राधेलाल गंधर्व का है। सवाल यह है कि एक ही आधार नंबर से दो लोगों को आधार कार्ड कैसे जारी हो सकता है? इससे साफ है कि जालसाजों ने किसान के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाकर उसका इस्तेमाल किया।

जिले में बढ़ते ऐसे मामले
बिलासपुर जिले में ऐसे कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं, जिनमें फर्जी आधार कार्ड और नकली मुख्तियार नामा के जरिए जमीन पर कब्जा किया गया।
प्रधान आरक्षक भैयालाल सूर्यवंशी की जमीन के मामले में सरकंडा पुलिस ने फर्जी आधार बनाने वाले को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
खमतराई के खसरा क्रमांक 672 की कीमती जमीन पर जालसाजों ने शातिर तरीके से कब्जा कर लिया था।
कुदूदण्ड की एक बुजुर्ग महिला की सिरगिट्टी स्थित जमीन को भी फर्जी मुख्तियार के जरिए बेच दिया गया, जिसमें शहर के एक प्रतिष्ठित व्यापारी का बेटा शामिल पाया गया। इस मामले में एफआईआर दर्ज है और विवेचना चल रही है।
प्रशासन और पुलिस पर सवाल
इन घटनाओं से यह साफ हो जाता है कि भूमाफियाओं को न केवल फर्जी दस्तावेज़ बनाने की पूरी तकनीकी जानकारी है, बल्कि कहीं न कहीं राजस्वकर्मियों और पंजीयन कार्यालय के कुछ लोगों की मिलीभगत भी हो सकती है। सवाल यह है कि अगर पंजीकरण प्रक्रिया इतनी सख्त और तकनीकी रूप से मजबूत है, तो फिर ऐसे फर्जी रजिस्ट्री कैसे संभव हो रही हैं?




