अमित दुबे की रिपोर्ट ;-
रतनपुर। धर्मनगरी रतनपुर की स्वच्छता व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमराई हुई है। नगर पालिका परिषद की लापरवाही अब खुलेआम नजर आने लगी है। वार्ड नंबर 3, 4 और 8 की गलियां कचरे के ढेरों से पटी पड़ी हैं। नगर की सुंदरता और धार्मिक पहचान अब गंदगी के ढेरों तले दबती जा रही है।
वार्ड न 03 महामाया मंदिर प्रांगण से सटे हेलीपैड क्षेत्र का हाल सबसे ज्यादा खराब बताया जा रहा है। यहां जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हैं, जिनसे उठती दुर्गंध से स्थानीय निवासी और श्रद्धालु परेशान हैं। प्लास्टिक, गत्ते, खाने के अवशेष और सड़े हुए पदार्थ सड़कों पर बिखरे पड़े हैं। इस गंदगी में आवारा मवेशी भोजन की तलाश करते देखे जा सकते हैं, जिससे संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा और बढ़ गया है।
वार्ड नंबर 04 बाजार की स्थिति भी इससे अलग नहीं है। बाजार के बीचों बीच कचरा मैदान मे भरा पड़ा है जो सफाई कर्मचारियों की अनदेखी के कारण लोग रोजाना गंदगी और बदबू के बीच जीवन जीने को मजबूर हैं। नागरिकों का कहना है कि नगर पालिका के सफाई वाहन भले ही कचरा इकट्ठा करते हों, लेकिन उसे सही तरीके से निस्तारित नहीं किया जाता।

वार्ड न 08 मेला ग्राउंड क्षेत्र में तो स्थिति और भी चिंताजनक है। कचरे के लगातार ढेर लगने से वहां स्थित तालाब लगभग नष्ट हो चुका है। यह इस बात का प्रमाण है कि नगर पालिका परिषद के पास नगर से निकलने वाले कचरे के स्थायी निस्तारण की कोई ठोस व्यवस्था नहीं है।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि वे कई बार शिकायतें दर्ज करा चुके हैं, लेकिन न तो सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कोई कार्रवाई की गई। लोगों ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल कदम उठाकर सफाई व्यवस्था को पटरी पर लाए, अन्यथा आने वाले दिनों में संक्रमण फैलने और बीमारियों के बढ़ने का खतरा गंभीर रूप ले सकता है।
नगर के जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की चुप्पी से नागरिकों में रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब धार्मिक नगरी रतनपुर में ही सफाई की ऐसी दुर्दशा है, तो प्रशासन की प्राथमिकताएं आखिर क्या हैं?



