सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
नारायणपुर के आंदोलन ने संभाग को जगाया — मंत्री और शीर्ष अधिकारियों से हुई कई दौर की चर्चा
इस मसले पर कई बार हाई-लेवल चर्चाएँ की गईं, जिनमें शामिल थे—
• कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप,
• स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल,
• राज्य स्वास्थ्य सचिव अमित कटारिया,
• DHS कमिश्नर एवं MD-NHM डॉ. प्रियंका जे. शुक्ला
नारायणपुर के डॉक्टरों ने पहले बैठक में केदार कश्यप से मुलाकात कर CRMC लंबित भुगतान की स्थिति बताई थी।
तत्पश्चात कश्यप ने स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य सचिव से फोन पर चर्चा कर समाधान का आश्वासन दिया था।
लेकिन आज तक कोई निर्णयात्मक कार्रवाई नहीं हुई—और यही कारण रहा कि नारायणपुर का विरोध अब पूरे बस्तर संभाग का आंदोलन बन चुका है।
प्रतीकात्मक विरोध, लेकिन संदेश बेहद कठोर — “अब कार्रवाई चाहिए, आश्वासन नहीं”
आज सभी जिलों के अस्पतालों में:
• डॉक्टरों, नर्सों और स्वास्थ्यकर्मियों ने काले रिबन के साथ ड्यूटी की
• OPD व Emergency सेवाएँ सामान्य रहीं
परंतु उनका संदेश सीधा था—
“हम जनता के खिलाफ नहीं, बल्कि लापरवाह व्यवस्था के खिलाफ हैं।”
“इतने जोखिम वाले क्षेत्र में काम करने वालों को 11 महीने तक प्रोत्साहन राशि न देना अन्याय है।”
OPD बहिष्कार की उलटी गिनती—1 दिसम्बर से बस्तर में स्वास्थ्य सेवाएँ प्रभावित होने की संभावना
नारायणपुर पहले ही घोषणा कर चुका है:
➡ 30 नवंबर तक भुगतान नहीं हुआ तो
➡ 1 दिसम्बर 2025 से संभाग-स्तरीय OPD बंद रहेंगे।
आज के संयुक्त विरोध को देखकर अब यह लगभग तय माना जा रहा है कि पूरा बस्तर इस आंदोलन में एक साथ खड़ा है।
निष्कर्ष : आसन्न निर्णय—सरकार भुगतान करेगी या बस्तर का सबसे बड़ा आंदोलन शुरू होगा?
नारायणपुर की पहल से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे बस्तर में फैल चुका है।
लाखों रुपये की लंबित राशि और 11 महीनों की प्रतीक्षा ने डॉक्टरों व स्वास्थ्यकर्मियों को अब निर्णायक कदम उठाने पर मजबूर कर दिया है।
अब नज़रें सरकार, स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव और DHS/NHM प्रशासन पर टिकी हैं—
क्या वे समय पर CRMC भुगतान करेंगे?
या 1 दिसम्बर से बस्तर संभाग इतिहास के सबसे बड़े स्वास्थ्य आंदोलन का सामना करेगा?



