अमित दुबे की रिपोर्ट
धार्मिक एवं पौराणिक नगरी रतनपुर में आज भक्ति, आस्था और जनसम्पर्क का एक विशेष संगम देखने को मिला, जब पूर्व मुख्यमंत्री के सुपुत्र चैतन्य बघेल अपने पूरे परिवार के साथ प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां महामाया देवी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर मां महामाया का आशीर्वाद प्राप्त किया।
मंदिर पहुंचते ही चैतन्य बघेल का स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं श्रद्धालुओं द्वारा आत्मीय स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बन गया। उन्होंने मंदिर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा की और माता के चरणों में प्रदेश की सुख-समृद्धि, शांति और उन्नति की कामना की।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि मां महामाया की कृपा से प्रदेश में खुशहाली और विकास का मार्ग प्रशस्त हो, यही उनकी कामना है। उन्होंने सभी प्रदेशवासियों के लिए स्वास्थ्य, समृद्धि और भाईचारे की भावना बनाए रखने की प्रार्थना भी की।
इस दौरान क्षेत्रीय विधायक अटल श्रीवास्तव, ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सुभाष अग्रवाल सहित कांग्रेस पार्टी के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने मिलकर मां महामाया की पूजा-अर्चना की और धार्मिक आयोजन में सक्रिय भागीदारी निभाई।
कार्यक्रम की एक विशेष बात यह रही कि स्थानीय शिक्षकों की भी गरिमामयी उपस्थिति देखने को मिली। क्षेत्र के कई शिक्षकों ने इस अवसर पर मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की तथा विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य और समाज में शिक्षा के प्रसार की कामना की। शिक्षकों ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजनों से समाज में नैतिक मूल्यों, संस्कारों और एकता की भावना को मजबूती मिलती है।
मंदिर परिसर में इस दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी रही। महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग एवं युवा सभी वर्गों के लोग माता के दर्शन हेतु पहुंचे। प्रशासन एवं मंदिर ट्रस्ट द्वारा दर्शन व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रबंध किए गए थे, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
स्थानीय श्रद्धालुओं एवं कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने चैतन्य बघेल का गर्मजोशी से स्वागत किया और उनके साथ दर्शन कर स्वयं को सौभाग्यशाली बताया। कई लोगों ने उनके साथ संवाद कर क्षेत्रीय विकास और जनसमस्याओं को भी साझा किया।
रतनपुर, जो अपनी प्राचीन धार्मिक परंपराओं, ऐतिहासिक महत्व और आध्यात्मिक पहचान के लिए विख्यात है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से एक बार फिर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और आस्था की गहराई को प्रदर्शित करता नजर आया। यहां आयोजित इस तरह के धार्मिक कार्यक्रम न केवल श्रद्धा का केंद्र होते हैं, बल्कि सामाजिक समरसता और जनसंपर्क का भी सशक्त माध्यम बनते हैं।





