अमित दुबे की रिपोर्ट
रतनपुर।
ऐतिहासिक महत्व से भरपूर गज किला एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार वजह गौरव नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के संरक्षण में आने वाले इस प्राचीन किले के आसपास चल रहे निर्माण कार्य में नियमों को ताक पर रखकर जेसीबी मशीन से खुदाई कराई जा रही है, जिससे ऐतिहासिक धरोहर पर खतरा गहराता जा रहा है।
नियमों की अनदेखी, मशीनों से खुदाई
मिली जानकारी के अनुसार, किले के चारों ओर पर्यटकों की सुविधा के लिए सीसी रोड का निर्माण कराया जा रहा है। लेकिन इस कार्य के दौरान Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958 के प्रावधानों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है।
कानून के तहत संरक्षित स्मारकों के 100 मीटर के दायरे में किसी भी प्रकार की खुदाई केवल मैन्युअल तरीके से ही की जा सकती है, ताकि जमीन के भीतर छिपे प्राचीन अवशेष सुरक्षित रह सकें। इसके बावजूद ठेकेदार द्वारा भारी मशीनों का उपयोग किया जा रहा है।
धरोहर को अपूरणीय नुकसान की आशंका
विशेषज्ञों का मानना है कि जेसीबी जैसी मशीनों से खुदाई करने पर जमीन के भीतर मौजूद प्राचीन मूर्तियां, संरचनाएं या अन्य ऐतिहासिक साक्ष्य नष्ट हो सकते हैं। इतना ही नहीं, इससे किले की मूल संरचना भी कमजोर पड़ सकती है, जिससे भविष्य में इसके क्षतिग्रस्त होने का खतरा बढ़ जाएगा।
स्थानीय लोगों में आक्रोश
इस मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और इतिहास प्रेमियों में गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि प्रशासन और संबंधित विभाग की अनदेखी के कारण क्षेत्र की अमूल्य धरोहर खतरे में पड़ गई है। उन्होंने तत्काल निर्माण कार्य पर रोक लगाने और जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
एएसआई की भूमिका पर उठे सवाल
पूरे मामले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की निगरानी और जिम्मेदारी पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि एएसआई समय रहते सक्रिय नहीं हुआ, तो इस ऐतिहासिक स्थल को गंभीर नुकसान हो सकता है।
क्या होगी कार्रवाई?
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि एएसआई इस मामले में क्या कदम उठाता है। क्या नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह ठंडे बस्ते में चला जाएगा—यह आने वाला समय ही बताएगा।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है: क्या हमारी ऐतिहासिक धरोहर सुरक्षित है?




