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बुलंद टाइम्स न्यूज/सुरेश सोनी
देश के 80वें स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर सामरिक मुख्यालय, 38वीं वाहिनी, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (ITBP) मुंजमेटा में आज स्वतंत्रता दिवस समारोह का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वाहिनी के अधिकारियों एवं जवानों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा राष्ट्र की स्वतंत्रता, एकता, अखंडता एवं संप्रभुता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

इसी क्रम में अबूझमाड़ क्षेत्र में तैनात 38वीं वाहिनी की सभी सीओबी (एडजूम, ईदवाया, आदेर, कुडमेल एवं जाटलूर) द्वारा भी अपने-अपने कैम्पों तथा क्षे़त्रों के बालक आश्रम/आगनबाडी केन्द्रों पर स्कूली बच्चों, स्थानीय ग्रामीणों, एवं जवानों के साथ स्वतंत्रता दिवस समारोह का गरिमापूर्ण आयोजन किया गया।
कैम्प मुंजमेटा समारोह के मुख्य अतिथि डिप्टी कमांडेंट श्री चिरंजी लाल बरसीवाल द्वारा राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया गया। ध्वजारोहण के पश्चात् उपस्थित सभी अधिकारियों एवं जवानों द्वारा पूरे सम्मान एवं गौरव के साथ राष्ट्रगान का सामूहिक गायन किया गया। इस दौरान पूरा परिसर देशभक्ति एवं राष्ट्रीय गौरव की भावना से ओत-प्रोत रहा।
इस अवसर पर डिप्टी कमांडेंट श्री चिरंजी लाल बरसीवाल ने उपस्थित सभी अधीनस्थ अधिकारियों एवं जवानों को स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने संबोधन में स्वतंत्रता सेनानियों एवं देश के वीर शहीदों के त्याग, बलिदान एवं संघर्ष को नमन करते हुए कहा कि देश की स्वतंत्रता असंख्य वीरों के बलिदान का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों के जवान विषम एवं चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों विशेषकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी अपने कर्तव्यों का निर्वहन पूरी निष्ठा, अनुशासन एवं समर्पण के साथ करते हैं। देश की सीमाओं एवं आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी निभाते हुए जवानों द्वारा राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। उन्होंने सभी जवानों से आह्वान किया कि वे अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी, साहस, अनुशासन एवं उच्च मनोबल के साथ करते हुए राष्ट्र की सेवा में निरंतर समर्पित रहें एवं कार्यक्रम के दौरान देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले अमर शहीदों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया गया।
समारोह का समापन राष्ट्र की समृद्धि, शांति, सुरक्षा एवं उज्ज्वल भविष्य की कामना के साथ हुआ। स्वतंत्रता दिवस का यह आयोजन उपस्थित सभी कार्मिकों के लिए देशभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा एवं राष्ट्रसेवा की भावना को और अधिक सुदृढ़ करने वाला रहा।




