हेमू साय की रिपोर्ट:-
पूर्व विधायक एवं जनप्रिय नेता *मनीष कुंजाम ने आज सुकमा प्रेस क्लब में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हाल ही में उनके घर पर पड़े छापे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने यह साफ किया कि यह छापेमारी एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य उन्हें बदनाम करना और असली गुनहगारों को बचाना है।
मनीष कुंजाम ने कहा, “मैंने खुद पहले शिकायत की थी, लेकिन इसके बावजूद मेरे घर पर छापा मारा गया। छापे में कुछ भी नहीं मिला, फिर भी मुझे बदनाम करने कीकोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासनिक स्तर पर उन पर लगातार दबाव डाला जा रहा था कि वे जिला एवं जनपद पंचायतों के गठन में भाजपा का समर्थन करें, लेकिन उन्होंने इन प्रस्तावों को ठुकरा दिया।
“नक्सल समस्या अब लगभग समाप्त हो रही है, और अब माइनिंग का खनन शुरू किया जाएगा। हम इसका विरोध करते हैं, और शायद यही असली वजह है इस तरह की कार्रवाइयों की।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एसीबी/EOW जैसी एजेंसियों को स्पष्ट रूप से प्रेस नोट जारी कर यह बताना चाहिए कि छापे में क्या मिला।
रायपुर से सुकमा तक दबाव
सूत्रों के मुताबिक, रायपुर से लेकर सुकमा जिला स्तर तक अधिकारियों पर लगातार दबाव डाला जा रहा है कि मनीष कुंजाम के खिलाफ कोई न कोई मामला लाया जाए। कुछ अधिकारियों ने अनौपचारिक बातचीत में यह भी कहा कि “अगर कुछ मिला नहीं, तो तलाशो कुछ… नहीं तो नौकरी खतरे में है।”
यह मामला सिर्फ आम जनता और कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बन गया है। कई अधिकारी मानते हैं कि मनीष कुंजाम जैसे ईमानदार जनप्रतिनिधि कम ही होते हैं, लेकिन मजबूरी में वे भी खामोश हैं।
जनता यह सवाल उठा रही है: “आखिर वह कौन सी अदृश्य शक्ति है, जो मनीष कुंजाम को निशाना बना रही है?” जिले में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि जो व्यक्ति भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठा रहा है, वही आज खुद भ्रष्टाचार और गलत आरोपों के शिकार हो रहा है।



