दंतेवाड़ा/नारायणपुर|— छत्तीसगढ़ के घने अबूझमाड़ के जंगलों में डीआरजी (जिला रिजर्व गार्ड) की एक ऐतिहासिक जवाबी कार्रवाई में सीपीआई (माओवादी) को अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया गया है। इस मुठभेड़ में संगठन के महासचिव नामबाला केशव राव उर्फ बसवराजु बीआर दादा गंगन्ना सहित 27 माओवादी कैडर मारे गए हैं।
ताड़मेटला की एके-47 की बरामदगी से खुला पुराना अध्याय
मुठभेड़ के बाद डीआरजी ने 2010 ताड़मेटला हमले में माओवादियों द्वारा लूटी गई एके-47 राइफल को पुनः बरामद कर लिया। यह वही हमला था जिसमें सुरक्षा बलों को भारी क्षति उठानी पड़ी थी और बसवराजु समेत अन्य माओवादियों ने हथियार लूट लिए थे।
इतिहास के गवाह बने हथियार
कुडमेल-कलहाजा-जाटलूर क्षेत्र में हुई मुठभेड़ के बाद बरामद हुए अन्य हथियारों में शामिल हैं:
एके-47 राइफल – 3 नग
एसएलआर – 4 नग
इंसास राइफल – 6 नग
कार्बाइन – 1 नग
.303 राइफल – 6 नग
बीजीएल लॉन्चर – 1 नग
सुरका (रॉकेट लॉन्चर) – 2 नग
12 बोर बंदूक – 2 नग
पिस्तौल – 1 नग
भरमार – 2 नग
साथ ही बड़ी मात्रा में अन्य हथियार एवं गोला-बारूद
शवों की शिनाख्त और विधिसम्मत अंतिम संस्कार
मुठभेड़ में मारे गए 27 माओवादियों में से 20 के शव उनके परिजनों को सौंपे गए, जबकि 7 शवों का दावा नहीं किया गया। इनमें बसवराजु का शव भी शामिल था। माओवादी कैडर कोसी @ हुंगी के परिजन शव लेने पहुँचे, पर संक्रामक बीमारी की आशंका को देखते हुए शव का अंतिम संस्कार नारायणपुर मुख्यालय में ही किया गया।
बसवराजु: आतंक का अंत
बसवराजु, जो 2018 से सीपीआई (माओवादी) का महासचिव था, हजारों आदिवासियों और सुरक्षाबलों की हत्या, बच्चों की जबरन भर्ती, और बस्तर क्षेत्र में आतंक फैलाने का मुख्य अभियुक्त रहा है। उस पर छत्तीसगढ़ सरकार ने ₹1 करोड़ और कुल मिलाकर ₹3.33 करोड़ का इनाम घोषित किया था। 258 से अधिक मामलों में उसकी संलिप्तता की जांच जारी है।
मारे गए अन्य प्रमुख माओवादी कैडर
1 महासचिव / पोलित ब्यूरो सदस्य (PBM)
1 डीकेएसजेडसीएम
4 सीवाईपीसीएम
3 पीपीसीएम
पीएलजीए कंपनी नंबर 7 के 18 सदस्य
2 माओवादी आंध्र प्रदेश से और 3 तेलंगाना से
माओवादी संगठन की स्वीकारोक्ति और प्रतिक्रिया
सीपीआई (माओवादी) द्वारा जारी प्रेस नोट में इस मुठभेड़ में 28 माओवादी कैडरों के मारे जाने की पुष्टि की गई है, जिसमें बसवराजु भी शामिल है। प्रेस विज्ञप्ति में संगठन ने अपने समर्थकों से देशभर में रैलियाँ व सभाएं आयोजित करने का आह्वान किया है — यह एक खतरनाक और भड़काऊ प्रयास है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं।
सुरक्षा बलों की रणनीतिक सफलता
यह कार्रवाई न केवल एक सैन्य सफलता है, बल्कि माओवादी नेटवर्क के मनोबल पर भी एक बड़ा आघात है। इस तरह की सटीक और निर्णायक कार्रवाई से अबूझमाड़ और आसपास के इलाकों में माओवादी गतिविधियों पर बड़ा नियंत्रण संभव हो सका है।



