अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर/बिलासपुर: सरकार द्वारा निःशुल्क दी जाने वाली शालेय पाठ्य पुस्तकें इस समय स्कूलों में रखी हुई हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि ये किताबें अभी तक विद्यार्थियों को नहीं बांटी गई हैं। स्कूल खुलने के कई सप्ताह बीत चुके हैं, बावजूद इसके छात्र-छात्राएं किताबों के लिए भटक रहे हैं।
मामले को लेकर जब डीईओ (जिला शिक्षा अधिकारी) से सवाल किया गया तो उन्होंने बताया कि “स्कूल स्तर पर किताबों की स्कैनिंग नहीं हो पाई है, इसी कारण से अभी वितरण की प्रक्रिया नहीं हो सकी है।”
गौरतलब है कि सरकार हर साल निःशुल्क किताबें उपलब्ध कराती है ताकि सभी बच्चों को समय पर अध्ययन सामग्री मिल सके, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के चलते इसका लाभ बच्चों तक समय पर नहीं पहुंच पा रहा है।
अभिभावकों में इसको लेकर नाराजगी है। एक अभिभावक ने बताया, “बच्चे बिना किताब के कैसे पढ़ेंगे? टीचर भी यही कहते हैं कि किताब आए तो पढ़ाई शुरू करें।”
वहीं कई स्कूलों में किताबें बॉक्सों में बंद पड़ी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते इनका वितरण नहीं हो रहा है।
क्या स्कैनिंग से बड़ा है बच्चों का भविष्य?
शिक्षा विभाग का यह तर्क कि स्कैनिंग नहीं हुई इसलिए किताबें नहीं दी जा सकतीं, कई सवाल खड़े करता है। क्या बच्चों की पढ़ाई स्कैनिंग से कम महत्वपूर्ण है? शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह तत्काल प्रभाव से किताबों का वितरण सुनिश्चित करे ताकि विद्यार्थियों का शैक्षणिक नुकसान रोका जा सके।
अगला कदम?
सूत्रों के अनुसार, यदि जल्द ही पुस्तकों का वितरण नहीं हुआ तो पालकों और सामाजिक संगठनों द्वारा इस मुद्दे को लेकर विरोध प्रदर्शन की भी संभावना है।



