अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। (विकासखंड कोटा) बिलासपुर शिक्षा का अधिकार (आरटीई) कानून बच्चों को समान शिक्षा का अधिकार देता है, लेकिन रतनपुर में इस कानून का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है। एक ही स्कूल भवन में दो अलग-अलग नामों से स्कूल संचालित हो रहे हैं – एक ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस हिंदी माध्यम विद्यालय’ और दूसरा ‘रामकृष्ण विद्यापीठ अंग्रेजी माध्यम विद्यालय’।
जानकारी के अनुसार, दोनों स्कूल एक ही इमारत में संचालित हो रहे हैं और पहली से बारहवीं कक्षा तक की पढ़ाई करवा रहे हैं। लेकिन न तो स्कूल भवन में कोई नामपट्ट नजर आता है और न ही इनकी पहचान स्पष्ट है। इतना ही नहीं, दोनों स्कूलों का UDISE कोड एक ही भवन के नाम पर जारी है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दोनों संस्थाएं कागजों में अलग-अलग हैं लेकिन भौतिक रूप से एक ही परिसर में संचालित हो रही हैं।

आरटीई कानून का दुरुपयोग
आरटीई अधिनियम के तहत निजी स्कूलों में गरीब एवं वंचित वर्ग के बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने का प्रावधान है। इसके तहत राज्य सरकार स्कूलों को प्रति छात्र वार्षिक राशि देती है। सूत्रों के अनुसार, इस विद्यालय परिसर में आरटीई के अंतर्गत इस वर्ष हिंदी माध्यम (नेताजी सुभाष चंद्र बोस) में 45 आवेदनों में से 26 बच्चों का दाखिला किया गया, जबकि अंग्रेजी माध्यम (रामकृष्ण विद्यापीठ) में 47 में से 25 बच्चों को प्रवेश मिला है।
एक ही परिसर में दो स्कूलों का संचालन और आरटीई दाखिलों का दोहराव कहीं न कहीं संदेह को जन्म देता है कि बच्चों के नाम पर सरकारी लाभ लिया जा रहा है।
सुविधाओं की कमी, खतरे में बच्चों का भविष्य
शिक्षा का स्तर क्या होगा जब एक ही इमारत में दो माध्यमों की पढ़ाई, अलग-अलग पाठ्यक्रम और शिक्षक व्यवस्था संचालित की जा रही हो? स्कूल परिसर में बुनियादी सुविधाएं जैसे कि शुद्ध पेयजल, शौचालय, खेल का मैदान और प्रयोगशाला तक अधूरी स्थिति में हैं। न तो स्कूलों के नाम बोर्ड पर दिखते हैं, न ही उनकी प्रशासनिक पहचान स्पष्ट है।
प्रशासन की चुप्पी सवालों के घेरे में
स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग की चुप्पी भी सवाल खड़े करती है। आखिर कैसे एक ही भवन से दो स्कूलों को अनुमति मिली? क्या इसकी जांच की गई? यदि नहीं, तो यह स्पष्ट रूप से विभागीय लापरवाही को दर्शाता है।
मांग – निष्पक्ष जांच हो
स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा के नाम पर व्यापार और आरटीई के नाम पर सरकारी लाभ का गलत उपयोग बच्चों के भविष्य के साथ अन्याय है।



