अमित दुबे की रिपोर्ट:–
रतनपुर। धार्मिक नगरी रतनपुर सावन के अंतिम सोमवार को शिवभक्तों की आस्था और उत्साह से सराबोर नजर आई। बेलपान से पवित्र जल लेकर निकले कांवड़ियों का जत्था भजन-कीर्तन और “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ बूढ़ा महादेव मंदिर पहुंचा, जहां भक्तों ने विधि-विधान से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक किया|

सुबह से ही बूढ़ा महादेव मंदिर परिसर में भक्तों की लंबी कतार
मंदिर के पुजारी ने प्रातःकाल महाआरती कर सावन के अंतिम सोमवार का पूजन प्रारंभ कराया। इसके बाद श्रद्धालु बारी-बारी से शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, शहद और पंचामृत अर्पित करते हुए बेलपत्र, धतूरा और आक के फूल चढ़ाते रहे। पूरे परिसर में “बोल बम”, “जय शंभू” और “हर हर महादेव” के जयकारे गूंजते रहे|

ऐतिहासिक महत्व और मान्यताएं
रतनपुर स्थित बूढ़ा महादेव मंदिर, जिसे प्राचीन काल में बृद्धेश्वर महादेव मंदिर के नाम से जाना जाता था, अपनी प्राचीनता और चमत्कारी मान्यताओं के कारण विश्व प्रसिद्ध है। मान्यता है कि द्वापर युग में राजा वृद्ध सेन ने इस मंदिर का निर्माण कराया था, जिसे बाद में 1050 ईस्वी में राजा रत्न देव ने जीर्णोद्धार कराया। मंदिर में स्थापित स्वयंभू शिवलिंग तांबे के आवरण में सुरक्षित है और इसमें चढ़ाया गया जल कभी बाहर नहीं निकलता, बल्कि गुप्त सुरंगों से होते हुए मंदिर परिसर के जलकुंड में समाहित हो जाता है|

प्रवेश द्वार में बैठे हैं नंदी महाराज
मंदिर प्रवेश द्वार पर विराजमान पाषाण नंदी का दर्शन और पूजन परम शुभकारी माना जाता है। यह भी जनश्रुति है कि राजा को प्राप्त स्वप्न आदेश के बाद इस मंदिर का निर्माण हुआ। इस मंदिर के जलकुंड का आचमन और दर्शन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है|
भक्तों का मेला और श्रद्धा का उल्लास
सावन के अंतिम सोमवार को न केवल रतनपुर बल्कि आसपास के जिलों और राज्यों से भी हजारों शिवभक्त यहां पहुंचे। कांवड़िए रविवार शाम से ही पवित्र नदियों से जल लेकर मंदिर की ओर बढ़ चले थे। रामटेकरी की तराई में स्थित इस प्राचीन शिवालय में भक्तों का रेला तड़के से ही लगा रहा।
महामाया मंदिर, पंचमुखी मंदिर और कंठी देवल मंदिर सहित रतनपुर के अन्य शिवालयों में भी सोमवार को श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचे, लेकिन सबसे अधिक भीड़ बूढ़ा महादेव मंदिर में देखने को मिली।
जनप्रतिनिधियों की सहभागिता
इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक अटल श्रीवास्तव भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने मंदिर प्रांगण में भक्तों को प्रसाद स्वरूप केला, सेव, मिठाई आदि अपने हाथों से वितरित किया। विधायक श्रीवास्तव ने भगवान भोलेनाथ से क्षेत्र की खुशहाली, समृद्धि और शांति की कामना की।
सावन का अंतिम सोमवार रतनपुर की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम बनकर उपस्थित हुआ, जिसमें भक्ति, उत्साह और लोक परंपराओं का अनूठा रंग देखने को मिला।



