
अमित दुबे की रिपोर्ट:-
रतनपुर : बिलासपुर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत कार्यरत संविदा कर्मचारी और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO) अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर 18 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। प्रदेश भर के करीब 26,000 कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हैं। परिणामस्वरूप विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों के ताले बंद हो गए हैं और खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
20 वर्षों से लंबित मांगें, सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप
हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि उनकी प्रमुख मांगें पिछले 20 वर्षों से लंबित हैं। जुलाई 2023 में उन्होंने नया रायपुर में एक माह लंबा आंदोलन भी किया था, जिसमें उस समय विपक्ष में रही वर्तमान सरकार के कई मंत्री और विधायक आंदोलनकारियों के बीच पहुंचे थे और उनकी मांगों को न्यायसंगत ठहराया था। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार बनने के 1 साल 8 महीने बाद भी उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कोई गंभीर पहल नहीं हुई है।
मुख्य मांगें
- हड़ताली कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों में से कुछ प्रमुख बिंदु हैं:
- ग्रेड पे निर्धारण
- अनुकम्पा नियुक्ति
- मेडिकल अवकाश की सुविधा
- चिकित्सा भत्ता
- नौकरी की सुरक्षा (जॉब सिक्योरिटी)
कर्मचारियों ने बताया कि अब तक 150 से अधिक बार शासन-प्रशासन को आवेदन और ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, ठोस निर्णय नहीं।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित
प्रदेश के कई उप-स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटक गए हैं। इसके चलते प्रसव (डिलीवरी), टीकाकरण, नियमित जांच, और दवाओं के वितरण जैसी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप हो गई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार की चुप्पी और कर्मचारियों की चेतावनी
अब तक राज्य सरकार की ओर से इस हड़ताल पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।



