अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। धार्मिक और पौराणिक महत्व की नगरी रतनपुर का ऐतिहासिक कृष्णाअर्जुनी तालाब इन दिनों गंभीर संकट से जूझ रहा है। सदियों पुराना यह तालाब, जिससे हजारों लोग निस्तारी, स्नान और दैनिक जरूरतों के लिए पानी का उपयोग करते हैं, अब प्रदूषण और लापरवाही का शिकार हो चुका है। अचानक तालाब का पानी बदरंग हो गया है, उसमें तीव्र बदबू फैल गई है और सतह पर हरे रंग की काई जैसी परत जम गई है।


मोहल्लेवासियों की चिंता – “अब निस्तारी के लिए कहां जाएं?”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि तालाब में मछली ठेकेदार द्वारा किसी रसायन या दवा का प्रयोग किया गया है, जिसकी वजह से पानी की गुणवत्ता बिगड़ गई है। पास ही रहने वाले बुजुर्ग विष्णु साहू ने कहा – “पानी में ऐसा कुछ डाला गया है जिससे उसकी रंगत ही बदल गई है, बदबू से घरों में रहना मुश्किल हो गया है।”
तालाब पर निर्भर सैकड़ों परिवारों के लिए यह संकट और भी गहरा है, क्योंकि वे रोजाना इसी पानी का इस्तेमाल स्नान, कपड़े धोने, बर्तन साफ करने और कभी-कभी पीने तक के लिए करते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चेतावनी
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह का दूषित और बदबूदार पानी त्वचा रोग, पेट संक्रमण, टायफाइड और हैजा जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह पानी बेहद खतरनाक है।
वार्ड पार्षद ने ठेकेदार को दी चेतावनी
मामले की गंभीरता देखते हुए वार्ड पार्षद इंदु यादव ने सक्रियता दिखाई और मोहल्लेवासियों के साथ मछली ठेकेदार के घर पहुंचकर तत्काल सफाई और सुधार की मांग रखी। उन्होंने ठेकेदार को सख्त चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर पालिका और प्रशासन के सामने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
इस दौरान मोहल्ले के कई लोग पार्षद के साथ मौजूद रहे जिनमें – श्यामा यादव, कांति यादव, भक्तिन यादव, तेजेंद्र पांडे, राजू यादव, गौतम कश्यप, विक्रम यादव, सौरभ ठाकुर,भुनेश्वर, शंकर यादव, महेश निर्मलकर, मनोज यादव, बल्लू गोंड, वाहिद अली, महेंद्र दुबे, सागर सोनी, सीनू यादव, कपिल कश्यप और वीनू धीवर और मुहल्ले के महिला पुरुष शामिल थे।
नगर प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
स्थानीय निवासियों और सामाजिक संगठनों ने नगर प्रशासन से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें –
तालाब के पानी की गुणवत्ता की जांच हो।
* पूरे तालाब की वैज्ञानिक पद्धति से सफाई और शुद्धिकरण किया जाए।
* दोषी ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाए।
सामाजिक संगठनों ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कदम नहीं उठाए गए, तो वे जन आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा
अब सबकी निगाहें नगर पालिका और प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस गंभीर जल संकट से निपटने के लिए कितनी संवेदनशीलता और दूरदर्शिता दिखाते हैं। सवाल यह है कि क्या रतनपुर का यह ऐतिहासिक कृष्णाअर्जुनी तालाब बच पाएगा, या फिर प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ जाएगा।




