अमित दुबे की रिपोर्ट,:-
रतनपुर। छत्तीसगढ़ में “भा ज पा सरकार” के दावे के बावजूद आम जनता को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। रतनपुर से लेकर गौरेला-पेंड्रा मार्ग तक की सड़क इस कदर जर्जर हो चुकी है कि लोगों का इस रास्ते से गुजरना किसी मुसीबत से कम नहीं। महामाया चौक से लेकर महामाया बाईपास तक की सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं, जिससे आए दिन वाहन चालक हादसों का शिकार हो रहे हैं।
यह मार्ग बिलासपुर जिले को गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले से जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है, जो अब राष्ट्रीय राजमार्ग के रूप में भी जाना जाता है। भारी वाहनों और लगातार बढ़ते यातायात के दबाव के कारण सड़क की स्थिति दिन-ब-दिन बिगड़ती चली गई, लेकिन हैरानी की बात यह है कि शासन-प्रशासन की ओर से अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।
स्थानीय नागरिकों और विपक्षी नेताओं ने सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उनका कहना है कि “डबल इंजन” का नारा देने वाली सरकार जनता को बुनियादी सुविधा तक नहीं दे पा रही है। सड़क की मरम्मत और रखरखाव के लिए न तो कोई ठेका प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नज़र आ रही है।
रतनपुर क्षेत्र के लोगों का कहना है कि बरसात के मौसम में सड़क पूरी तरह कीचड़ और गड्ढों में तब्दील हो जाती है। आए दिन दोपहिया वाहन चालक फिसलकर घायल हो रहे हैं, वहीं चारपहिया वाहनों को चलाना भी मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीजों को लेकर जाने वाली एंबुलेंस, व आम नागरिक – सभी को इस मार्ग से गुजरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्र की जनता ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द से जल्द सड़क की मरम्मत नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे। जनता ने साफ कहा है कि वे सड़कों पर उतरकर चक्का जाम करेंगे, और इससे होने वाली अव्यवस्था व परेशानी की जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभागीय अधिकारियों की होगी।
विपक्षी नेताओं ने कहा है कि सरकार जनता की मूलभूत जरूरतों की अनदेखी कर रही है। सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं की जिम्मेदारी सरकार की होती है, लेकिन इस “डबल इंजन” सरकार के शासन में सिर्फ़ दावे किए जा रहे हैं, ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।
जनता अब खुलकर सवाल पूछ रही है — आखिर कब तक उन्हें इस टूटी-फूटी सड़क से गुजरना पड़ेगा? क्या सरकार को जनता की परेशानी की कोई परवाह नहीं?
अब देखने वाली बात होगी कि जनता के इस आक्रोश के बाद प्रशासन जागता है या फिर सड़क की दुर्दशा यूं ही जारी रहती है।



