सुकमा/छत्तीसगढ़ | छत्तीसगढ़–आंध्र सीमा पर सुरक्षा बलों की ऐतिहासिक सफलता
छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश की सीमा से सबसे बड़ी नक्सल विरोधी सफलता सामने आई है। कुख्यात और बहुचर्चित नक्सली कमांडर मांडवी हिड़मा सुरक्षा बलों के साथ भीषण मुठभेड़ में मारा गया। हिड़मा के साथ उसकी पत्नी राजे के भी मारे जाने की पुष्टि हुई है। सुरक्षा बलों ने घटनास्थल से कुल 6 नक्सलियों के शव बरामद किए हैं।
मुठभेड़ के बाद इलाके में ग्रेहाउंड फोर्स का सर्चिंग ऑपरेशन लगातार जारी है।
1 करोड़ का इनामी नक्सली था हिड़मा
हिड़मा लंबे समय से सुरक्षा एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। उस पर छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि कई राज्यों में कुल 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
वह माओवादी संगठन की सबसे घातक इकाई PLGA बटालियन नंबर–1 का प्रमुख था।

- खूनी इतिहास: इन हमलों के लिए था जिम्मेदार
- 2010 दंतेवाड़ा हमला: CRPF के 76 जवान शहीद
- 2013 झीरम घाटी नरसंहार: कांग्रेस नेताओं सहित 27 लोगों की हत्या
- 2021 सुकमा-बीजापुर मुठभेड़: 22 जवान शहीद
हिड़मा ने पिछले वर्षों में दक्षिण बस्तर में नक्सली गतिविधियों को गति दी और सुरक्षा बलों पर कई बड़े हमले करवाए।

कौन था हिड़मा?
मांडवी हिड़मा का जन्म वर्ष 1981 में सुकमा जिले के पूर्वती क्षेत्र में हुआ था। बेहद कम उम्र में वह माओवादी संगठन से जुड़ गया और कुछ ही वर्षों में खूंखार हमलावर इकाई में शामिल हो गया।
PLGA बटालियन नंबर–1 को नक्सलियों की सबसे घातक और प्रशिक्षित कमांडो टुकड़ी माना जाता है, जिसकी कमान लंबे समय से हिड़मा के हाथ में थी।
कार्रवाई के बाद क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई गई
मुठभेड़ की जानकारी मिलते ही आसपास के थानों और कैंपों को अलर्ट किया गया है। सुरक्षा बलों ने बड़े क्षेत्र को घेरकर combing ऑपरेशन तेज कर दिया है।
अंतिम लाइन (समापन)
हिड़मा का मारा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। इस कार्रवाई से दक्षिण बस्तर में नक्सलियों की कमर टूटने की संभावना जताई जा रही है।



