अमित दुबे की रिपोर्ट :-
बिलासपुर /रतनपुर |धार्मिक एवं पौराणिक नगरी रतनपुर स्थित माँ महामाया देवी का मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र है, जहां प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं। मंदिर तक पहुंचने वाले प्रमुख मार्ग के दोनों ओर वर्षों से प्रसाद, पूजा सामग्री, खिलौने, जनरल स्टोर तथा खान–पान की दुकानें संचालित हैं, जो श्रद्धालुओं की आवश्यकताओं की पूर्ति करती हैं और मंदिर परिसर की गतिविधियों का अहम हिस्सा मानी जाती हैं।
हालांकि, बीते कुछ समय से इन दुकानों द्वारा किए जा रहे अतिक्रमण ने गंभीर समस्या का रूप ले लिया है। स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार दुकानदार अपने-अपने प्रतिष्ठानों से बाहर निकलकर सड़क पर 10 से 15 फीट तक सामान फैलाकर दुकानें सजा रहे हैं। इससे करीब 20 फीट चौड़ी सड़क सिमटकर मात्र 10 फीट की रह गई है। परिणामस्वरूप दर्शनार्थियों के आवागमन में भारी अव्यवस्था उत्पन्न हो रही है।

विशेष रूप से नवरात्रि, रविवार, पर्व-त्योहार एवं विशेष आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने पर स्थिति और भी विकट हो जाती है। दर्शन के लिए कतार में लगे श्रद्धालुओं को आगे-पीछे निकलने में कठिनाई होती है, वहीं सड़क संकरी होने से जाम जैसी स्थिति बन जाती है। महिलाओं, बुजुर्गों एवं बच्चों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
कई श्रद्धालुओं ने आशंका जताई है कि किसी आपात स्थिति में संकरी सड़क बड़ा खतरा बन सकती है।
मंदिर ट्रस्ट इस समस्या के समाधान के लिए प्रयासरत बताया जा रहा है, किंतु मार्ग के किनारे स्थित कुछ दुकानें ट्रस्ट के अधीन न होकर निजी स्वामित्व की होने के कारण ट्रस्ट द्वारा उन पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा पा रही है। इसी वजह से अतिक्रमण की समस्या जस की तस बनी हुई है।

स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इस गंभीर समस्या का समाधान अब केवल प्रशासनिक हस्तक्षेप से ही संभव है। यदि समय रहते अतिक्रमण हटाकर मार्ग को पूरी तरह सुगम बनाया जाए, तो मां महामाया के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु न केवल श्रद्धा बल्कि सुविधा और सुरक्षा का भी अनुभव कर सकेंगे।
नगरवासियों ने जिला प्रशासन, नगर पालिका परिषद एवं पुलिस प्रशासन से मांग की है कि वे इस मामले का संज्ञान लेकर सख्त कार्रवाई करें, अतिक्रमण हटवाएं और भविष्य में दोबारा कब्जा न हो, इसके लिए स्थायी व्यवस्था लागू करें। लोगों का मानना है कि इससे रतनपुर की धार्मिक गरिमा बनी रहेगी और श्रद्धालुओं को अनावश्यक असुविधा से राहत मिलेगी।



