अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर। धार्मिक व पौराणिक नगरी रतनपुर में खंडोबा मंदिर के समीप से कलमिटार ग्राम को जोड़ने वाली सड़क अब विकास की नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता की पहचान बन चुकी है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत निर्मित यह मार्ग आज बदहाली, गंदगी और जानलेवा गड्ढों से पटकर ‘हादसों की प्रयोगशाला’ में तब्दील हो गया है। वर्षों से उपेक्षित यह सड़क न केवल आम नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनी है, बल्कि किसी भी समय बड़े हादसे को दावत दे रही है।
रोज़मर्रा की आवाजाही, हर पल खतरा
इस सड़क से प्रतिदिन दर्जनों गांवों के ग्रामीण, मजदूर, छात्र-छात्राएं, व्यापारी और श्रद्धालु गुजरते हैं। खास बात यह है कि इसी मार्ग पर रानी गांव की शासकीय शराब भट्ठी और अहाता स्थित है, जहां सुबह से देर रात तक भारी भीड़ रहती है। परिणामस्वरूप दिनभर दोपहिया, चारपहिया और पैदल यात्रियों का दबाव बना रहता है, लेकिन सड़क की हालत इतनी दयनीय है कि हर सफर डर के साये में पूरा होता है।

गड्ढे, बहता पानी और नालियों की गंदगी
खंडोबा मंदिर से आगे बढ़ते ही सड़क पर गहरे, अनियमित और खतरनाक गड्ढे किसी जाल की तरह फैले हुए हैं। जगह-जगह सड़क पर पानी जमा है, वहीं आसपास के घरों और दुकानों का नाली का गंदा पानी सीधे सड़क पर बह रहा है। इससे फिसलन बढ़ गई है और रात के समय गड्ढों का अंदाजा लगाना और भी मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ना आम हो गया है, जबकि बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह रास्ता किसी जोखिम भरे ट्रैक से कम नहीं।
दुर्घटनाओं की आशंका, पर चेतावनी शून्य
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मार्ग पर छोटी-बड़ी दुर्घटनाएं आए दिन होती रहती हैं, लेकिन सौभाग्यवश अब तक कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। बावजूद इसके, न तो सड़क किनारे चेतावनी संकेत लगाए गए हैं, न ही अस्थायी मरम्मत या सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए हैं। बारिश के दिनों में हालात और भयावह हो जाते हैं, जब गड्ढे पानी से भरकर पूरी तरह अदृश्य हो जाते हैं।

शिकायतें बेअसर, अधिकारी मौन
ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार संबंधित विभागों और अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। न सड़क की मरम्मत कराई गई, न नाली व्यवस्था दुरुस्त हुई और न ही यातायात नियंत्रण के कोई कदम उठाए गए। लोगों का कहना है कि अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं और किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं।
जनता का सवाल — कब जागेगा प्रशासन?
स्थानीय निवासियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। उनका कहना है कि मजबूरी में हर दिन जान हथेली पर रखकर इस सड़क से गुजरना पड़ता है। अब सबसे बड़ा और गंभीर सवाल यही उठ रहा है — क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे या किसी की मौत के बाद ही जागेगा?
ग्रामीणों ने मांग की है कि इस मार्ग की तत्काल मरम्मत कराई जाए, नाली व्यवस्था सुधारी जाए, सड़क पर चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं तथा जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, ताकि रतनपुर का यह मार्ग विकास की राह पर लौट सके, न कि हादसों का रास्ता बना रहे।



