अमित दुबे की रिपोर्ट ;-
रतनपुर : धार्मिक एवं ऐतिहासिक नगरी रतनपुर में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला माघी पूर्णिमा आदिवासी विकास मेला इस वर्ष और भी अधिक पारंपरिक व सांस्कृतिक स्वरूप में आयोजित किया जाएगा। मेले के आयोजन को लेकर प्रशासनिक तैयारियां तेज हो गई हैं। यह मेला 1 फरवरी से 7 फरवरी 2026 तक आयोजित होगा।
इसी क्रम में मेले के सुचारू, शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित आयोजन को सुनिश्चित करने हेतु नगरपालिका परिषद भवन, रतनपुर में एक महत्वपूर्ण समन्वय बैठक का आयोजन किया गया। बैठक की अध्यक्षता नगरपालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने की, जबकि बैठक का संचालन तहसीलदार शिल्पा भगत के नेतृत्व में किया गया।
बैठक में नगरपालिका सीएमओ सुखसागर खुटे, थाना प्रभारी निलेश पाण्डे, नगर के पार्षदगण तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक के दौरान मेले की व्यवस्थाओं, सुरक्षा प्रबंधों और आयोजन के स्वरूप को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

इस वर्ष नहीं लगेंगी शासकीय विभागों की प्रदर्शनियाँ
धान खरीदी कार्य के मद्देनज़र बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया कि इस वर्ष माघी पूर्णिमा मेले में शासकीय विभागों द्वारा लगाई जाने वाली प्रशासनिक, जनकल्याणकारी एवं रोजगारोन्मुखी योजनाओं की प्रदर्शनियाँ नहीं लगाई जाएंगी।
इसके स्थान पर मेले को आदिवासी परंपरा, लोकसंस्कृति, हस्तशिल्प, खान-पान और धार्मिक आस्था से जुड़े स्वरूप में आयोजित किया जाएगा, ताकि इसकी मूल पहचान बनी रहे।

प्रशासन को दिए गए आवश्यक निर्देश
तहसीलदार शिल्पा भगत ने बैठक में उपस्थित सभी विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया कि मेला अवधि के दौरान
सुरक्षा व्यवस्था,
स्वच्छता एवं साफ-सफाई,
यातायात प्रबंधन,
पेयजल आपूर्ति,
विद्युत व्यवस्था
तथा अन्य मूलभूत सुविधाओं को लेकर आपसी समन्वय से कार्य किया जाए, जिससे श्रद्धालुओं और आगंतुकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है माघी मेला
नगरपालिका अध्यक्ष लवकुश कश्यप ने कहा कि “माघी पूर्णिमा मेला रतनपुर क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान है।
इसे शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित और गरिमामय ढंग से संपन्न कराना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। प्रशासन, जनप्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर इसे सफल बनाएंगे।”
सहयोग का दिया आश्वासन
बैठक में उपस्थित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों से संबंधित महत्वपूर्ण सुझाव प्रस्तुत किए और माघी पूर्णिमा आदिवासी विकास मेले को पूर्ण सहयोग के साथ सफल बनाने का आश्वासन दिया।
उल्लेखनीय है कि माघी पूर्णिमा मेला न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह आदिवासी संस्कृति, लोककला और परंपराओं के संरक्षण का भी एक महत्वपूर्ण मंच है, जिसे लेकर क्षेत्रवासियों में विशेष उत्साह देखने को मिल रहा है।



