अमित दुबे की रिपोर्ट :-
रतनपुर।छत्तीसगढ़ की धार्मिक नगरी लहुरी काशी रतनपुर में माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर आस्था, परंपरा और संस्कृति का भव्य संगम देखने को मिला। ऐतिहासिक दुलहरा सरोवर में तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां विधि-विधान के साथ पुण्य स्नान कर श्रद्धालुओं ने धर्मलाभ अर्जित किया। इसी के साथ परंपरागत माघी पूर्णिमा मेले का विधिवत शुभारंभ हुआ।
ब्रह्म मुहूर्त से उमड़ी श्रद्धा
ब्रह्म मुहूर्त में शंख-घंटों की ध्वनि और “हर-हर महादेव” के जयघोष के बीच श्रद्धालुओं ने दुलहरा सरोवर में आस्था की डुबकी लगाई। मान्यता है कि माघी पूर्णिमा पर यहां स्नान करने से पापों का क्षय होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। स्नान के पश्चात श्रद्धालुओं ने मां महामाया, भगवान शिव सहित प्रमुख देवी-देवताओं के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।

परंपरा, संस्कृति और लोकजीवन का उत्सव
मेले में छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति की झलक साफ दिखाई दी। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे ग्रामीणजन, लोकगीतों की गूंज, ढोल-मांदर की थाप और भक्ति रस में डूबा वातावरण मेले को विशेष बना रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी में उत्साह और उमंग नजर आई।
व्यापारिक चहल-पहल, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल
मेले में स्थानीय कारीगरों और व्यापारियों द्वारा हस्तशिल्प, पूजा सामग्री, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, खिलौने, झूले आदि की दुकानों ने रौनक बढ़ाई। पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू ने भी श्रद्धालुओं को आकर्षित किया। इससे स्थानीय व्यापार को संबल मिला और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में गति आई।
सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन द्वारा पेयजल, स्वच्छता, प्रकाश, यातायात और सुरक्षा के समुचित इंतजाम किए गए। पुलिस बल की तैनाती, स्वयंसेवकों की सक्रियता और स्वास्थ्य टीम की उपलब्धता से मेला शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होने की दिशा में अग्रसर रहा।
आस्था के साथ सामाजिक समरसता का संदेश
माघी पूर्णिमा मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी है। यहां विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों से आए श्रद्धालु एक साथ पूजा-अर्चना कर भाईचारे का संदेश देते हैं।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
श्रद्धालुओं ने कहा कि रतनपुर की धार्मिक ऊर्जा और दुलहरा सरोवर का पुण्य स्नान उन्हें आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। कई श्रद्धालु वर्षों से इस अवसर पर यहां आकर परंपरा का निर्वहन करते आ रहे हैं।
समापन में, लहुरी काशी रतनपुर में माघी पूर्णिमा का यह आयोजन आस्था, संस्कृति और जनजीवन के सुंदर समन्वय के रूप में स्मरणीय बन गया, जहां श्रद्धा की डुबकी के साथ विश्वास और परंपरा की निरंतरता का उत्सव मनाया गया।



