बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर नारायणपुर जिले के ग्राम भोंगापाल में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के सैकड़ों ग्रामीणों ने भाग लिया। दिनभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा और पूरे क्षेत्र में धार्मिक एवं आध्यात्मिक माहौल देखने को मिला।
कोंडागांव, नारायणपुर और कांकेर की सीमा पर लतुरा नदी के किनारे स्थित ग्राम भोंगापाल एक ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल के रूप में अपनी अलग पहचान रखता है। वर्ष 1990-91 में पुरातत्व विभाग द्वारा यहां की गई खुदाई में 6वीं-7वीं शताब्दी की विशालकाय बौद्ध प्रतिमा प्राप्त हुई थी, जिसके बाद से इस क्षेत्र में पर्यटन की संभावनाएं बढ़ गई हैं।
मान्यता है कि कलिंग युद्ध के दौरान सम्राट अशोक ने इस स्थान पर विश्राम किया था और उनके द्वारा यहां बौद्ध चैत्य का निर्माण कराया गया था। यह स्थल न केवल बौद्ध धर्म, बल्कि हिंदू धर्म की भी साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। यहां पाए जाने वाले विशाल शिवलिंग और सप्तमातृका की मूर्तियां इस बात का प्रमाण हैं।
बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों ने पूजा-अर्चना कर शांति और समृद्धि की कामना की। भोंगापाल कोंडागांव से लगभग 70 किलोमीटर और नारायणपुर से करीब 40 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व से परिपूर्ण भोंगापाल में ऐसे आयोजनों से क्षेत्र की पहचान और पर्यटन को नई दिशा मिलने की उम्मीद है।




