Oplus_131072
बुलंद टाइम्स न्यूज़/अख्तर मेमन
गरियाबंद। जिला मुख्यालय से करीब 227 किलोमीटर दूर देवभोग से लगे तेलनदी निष्टिगुड़ा कर्चिया सेंदमुडा करलागुडा गाड़ाघाट सितलिजोर पूर्णापानी सहित अन्य रेत घाट से रेत की अवैध रेत निकासी बदस्तूर जारी है सिर्फ अगर करलागुडा रेत घाट की बात करे तो इस घाट से रोजाना सौ से अधिक ट्रिप टैक्टर से रेत निकला जाता हैं इसी तरह तेलनदी और निष्टिगुड़ा घाट से भी दिन भर में 150 से अधिक ट्रिप रेत उत्खनन हो रहा है साथ ही पुरनापानी गाढ़ाघाट से हाईवा के ज़रिए रेत उत्खनन किया जा रहा है और इस अवैध रेत उत्खनन से वाक़िफ़ प्रशासन खनिज अधिकारी सहित पूरा प्रशासनिक अमला कार्यवाही की जगह मुखदर्शक बना हुआ हैं मतलब सेटिंग और संरक्षण के बीच लगातार खनिज संपदा का दोहन किया जा रहा है जबकि ऐसे अवैध रेत निकासी से सरकार को हर महीना लाखो रुपए की नुकसान उठानी पड़ रही है आपको यह जानकर आश्चर्य होगा नवपदस्थ खनिज विभाग अधिकारियों द्वारा अब एक भी ऐसे कोई बड़ी कार्यवाही को अंजाम नहीं दिया है जिससे अवैध उत्खनन पर नकेल कसा जा सके शायद यही वजह है कि दिनों दिन रेत खनन की मात्रा अलग अलग रेत घाट पर बढ़ती जा रही हैं पर्यावरण गाइड लाइन अनुसार नदी का कटाव रोकने नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बनाए रखने और जैव विविधता की रक्षा के अलावा जलीय जीवों का संरक्षण जैसे अन्य दिशा निर्देशों का परिपालन करते हुए कागज पर बीते 10 जून से अधिकृत पूरनापानी घाट बंद हो लेकिन पूरनापानी के साथ उल्लेखित रेत घाटों से भी रेत की निकासी जोरो से हो रही है और यह अवैध रेत उत्खनन कोई चोरी छुपे नहीं बल्कि एसडीएम कार्यालय तहसील कार्यालय सहित अन्य विभाग अधिकारियों के नजरो से होकर गुज़र रही हैं बाबजूद इसके रोजाना घाट से रेत की दोहन करने वाले अधिकांश टैक्टर प्रशासन की कार्यवाही से दुर है और कार्यवाही की मांग जब भी उठती हैं तो 127 किलोमीटर दूर बैठे खनिज अधिकारी स्थानीय अधिकारी पर ढकेल देते हैं तो दूसरी ओर शिकायत का इंतजार किया जाता है मतलब ना रेत घाट की दोहन की चिंता है और ना सरकार की आर्थिक नुकसान से मतलब है।
अवैध रेत निकासी से पंचायतों में बनी सड़कों की हालत खराब…
रेत की अवैध निकासी से सिर्फ राजस्व को नहीं बल्कि पंचायतों में बनाए सरपंच सचिव द्वारा सड़क को भी हो रहा है ऐसे रोहनागुड़ा पंचायत में 2 माह पहले बनाई गई लाखों की लागत से सड़क रेत से भरे ओवरलोड ट्रैक्टर और हाइवा लगातार आवाजाही करते हैं जिससे सीसी रोड पर दरार आने के साथ साथ सड़कें टूट रही हैं तथा गड्ढों में बदलती जा रही हैं इससे ग्रामीणों किसानों स्कूली बच्चों और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सेवाओं को आने-जाने में कठिनाई होती है धूल शोर और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है रोहनागुड़ा सरपंच परमानंद नागेश का कहना है करलागुड़ा रेत घाट से करीब करीब 20 टैक्टर रोज रेत निकासी में होते है उनमें से 8 से 10 टैक्टर तो ऐसे हैं जो दिन रात रेत उत्खनन करते है ऐसे में रोजाना सौ से भी अधिक टैक्टर से रेत उत्खनन होता है कहीं कहीं तो काफ़ी ज़्यादा रेत भरा होता हैं और इस ओवरलोडिंग के चलते 2 माह पहले बनाई गई सड़क पर दरार पड़ रही हैं जिसके मद्देनजर रेत माफियाओ को समझाईश देने की बात कही है अन्यथा कार्यवाही के पत्राचार करने का भी इशारा किया।
4 घाट से हर दिन सरकार को 1 लाख 50 हज़ार नुकसान…
ज़वाबदेही अधिकारियों के सेटिंग होने और रेत माफियाओ को संरक्षण देने से राज्य सरकार को किस हद राजस्व नुक़सान होता हैं यह महज़ पुरनापानी करलागूडा तेलनदी निष्टिगुड़ा रेत घाट से समझा जा सकता है करलागुड़ा रेत घाट से कम से कम दिन भर में सौ ट्रिप रेत निकासी करते हैं और 500 रुपय रायल्टी के हिसाब से लिया जाए तो रोजना 50 हज़ार का नुक़सान और निष्टिगुड़ा और तेल नदी में 150 ट्रिप टैक्टर की बात करे तो 75 हजार साथ ही पूरनापानी और गाड़ाघाट से 6 ट्रिप हाइवा का अगर रायल्टी देखें तो मोटा मोटा 30 हजार रुपए माना जाता है इस हिसाब से इन चार रेत घाट से ही सरकार को 1 लाख 50 हजार से अधिक राशि का राजस्व नुकसान उठाना पड़ता जबकि सेंडमुड़ा कर्चिया जैसे कई रेत घाट और है।



