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बुलंद टाइम्स न्यूज, गंडई/पंडरिया। दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर शिक्षा और रोजगार के अधिकार की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे देश के नौजवानों और छात्र-छात्राओं पर हुए बर्बर लाठीचार्ज और पुलिसिया दुर्व्यवहार के खिलाफ देशभर में जनआक्रोश की लहर दौड़ गई है। इस अमानवीय और दमनकारी घटना की कड़ी निंदा करते हुए युवा किसान नेता एवं ब्लॉक सरपंच संघ छुईखदान के पूर्व अध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल ने केंद्र की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एवं मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
शिक्षा और रोजगार मांगने वालों पर लाठियां भांजना अमानवीय:
पूर्व सरपंच संघ अध्यक्ष रणजीत सिंह चंदेल ने कड़े शब्दों में विरोध दर्ज कराते हुए कहा कि जो युवा देश का भविष्य संवारने और अपने मौलिक लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे थे, उन पर लाठीचार्ज और अभद्रता करना भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक काला धब्बा है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 में इन्हीं युवाओं और छात्रों के सहारे केंद्र की सत्ता में आई मोदी सरकार आज अपने ही देश के नौजवानों के खून की प्यासी हो चुकी है। निहत्थे और निर्दोष छात्रों पर जिस तरह का दमन चक्र चलाया गया है, उससे पूरे देश का सिर शर्म से झुक गया है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जोरदार मांग
श्री चंदेल ने केंद्र सरकार पर करारा प्रहार करते हुए कहा कि देश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। छात्रों को बेहतर शिक्षा और रोजगार देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुई मोदी सरकार अब तानाशाही पर उतर आई है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे घटनाक्रम की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने इस अमानवीय रवैये के लिए देश के गृह मंत्री से भी जवाबदेही तय करने की मांग की।
तानाशाही रवैये से अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि धूमिल
रणजीत सिंह चंदेल ने आगे कहा कि महात्मा गांधी के इस देश में जहाँ अहिंसा को सर्वोच्च स्थान दिया गया है, वहाँ छात्रों के साथ ऐसा हिंसक और दमनकारी बर्ताव पूरी दुनिया में भारत की साख को बट्टा लगा रहा है। विदेश में बैठे प्रवासी भारतीय और मित्र देश भी सरकार के इस तानाशाही और अलोकतांत्रिक रवैये की आलोचना कर रहे हैं।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इतिहास जबरन सत्ता में बने रहने वाले अधिनायकों से नहीं, बल्कि अपने अधिकारों के लिए लड़ने वाले नागरिकों के संघर्ष से लिखा जाता है। यदि सरकार ने समय रहते अपनी इस दमनकारी नीति में सुधार नहीं किया और युवाओं की समस्याओं का समाधान नहीं निकाला, तो आने वाले समय में देश की जनता इस अहंकारी सत्ता को उखाड़ फेंकने का काम करेगी।




