पत्थलगांव/तमता। तमता स्थित बालक छात्रावास के अधीक्षक बुधनाथ भगत पर चतुर्थ श्रेणी पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपए लेने का आरोप सामने आने के बाद मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत कोड़केलखजरी निवासी सुलेमान खलखो का आरोप है कि लुड़ेग हॉस्टल में नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे करीब 4.50 लाख रुपए, जबकि उनकी पत्नी अंजू इक्का से तमता में ड्यूटी दिलाने के नाम पर 1.30 लाख रुपए लिए गए। पीड़ित पक्ष के मुताबिक लंबे समय तक नौकरी का भरोसा दिया गया, लेकिन न नियुक्ति आदेश मिला और न ही कोई आधिकारिक जॉइनिंग लेटर।
मामले में नया मोड़ तब आया जब सूत्रों के अनुसार अधीक्षक द्वारा पीड़ित पक्ष को ली गई पूरी रकम वापस कर दी गई। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि रकम वास्तव में ली ही नहीं गई थी, तो उसे वापस करने की नौबत क्यों आई? हालांकि रकम लौटाना अपने आप में आरोप का कानूनी प्रमाण नहीं माना जा सकता, लेकिन इससे पूरे मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच की जरूरत जरूर बढ़ जाती है।
पीड़ित महिला ने पैसे मांगने के दौरान अधीक्षक की पत्नी पर बदसलूकी और धमकी देने का भी आरोप लगाया है। पीड़ित पक्ष का यह भी दावा है कि नौकरी के नाम पर क्षेत्र के अन्य लोगों से भी रकम लिए जाने की जानकारी सामने आ रही है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
अब छात्रावास की व्यवस्थाएं भी जांच के दायरे में
स्थानीय लोगों द्वारा छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं, सामग्री, विद्यार्थियों को मिलने वाली व्यवस्थाओं और अन्य प्रशासनिक रिकॉर्ड की जानकारी के लिए आरटीआई लगाने की तैयारी की जा रही है। आरटीआई के जरिए सामने आने वाली जानकारी से छात्रावास की वास्तविक व्यवस्थाओं और कमियों की तस्वीर स्पष्ट हो सकती है।
अब सवाल यह है कि इतने गंभीर आरोप सामने आने के बावजूद संबंधित विभाग ने मामले की विभागीय जांच शुरू की या नहीं? स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।




