छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में जनसमस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी प्रशासन के उद्देश्य से शुरू की गई ‘जन सेतु संकल्प योजना’ धरातल पर दम तोड़ती नज़र आ रही है। गरियाबंद जिले के सीमांत ब्लॉक देवभोग अंतर्गत ग्राम पंचायत खोकसरा में आयोजित विशेष समाधान शिविर इसका प्रत्यक्ष उदाहरण बन गया। शिविर का मूल ध्येय आम जनता को उनके ही गांव में राहत पहुंचाना था, लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी, लचर व्यवस्था और सिर्फ फोटो खिंचवाने की होड़ के कारण यह पूरा आयोजन महज़ एक औपचारिकता बनकर रह गया।
समस्याओं का पुलिंदा, समाधान शून्य
खोकसरा में आयोजित जन सेतु शिविर को लेकर गरियाबंद जिले के प्रभारी मंत्री श्री दयाल दास बघेल महासमुंद लोकसभा सांसद श्रीमती रूप कुमारी चौधरी व बहु चर्चित युवा नेता गौरी शंकर कश्यप जी जिला पंचायत गरियाबंद के जैसे ही आम पब्लिक सुनाने लगी मन में एक उत्साह नजर आ रही थी और दर्जनों गांवों के निवासियों में भारी उत्साह था। पर अपनी बरसों पुरानी मांगों और रोजमर्रा की समस्याओं का निराकरण पाने की आस में तड़के । मूलभूत से जुड़ी समस्याओं को लेकर आवेदनों देने का अंबार लग गया। था
परंतु, जैसे-जैसे दिन ढलता गया, ग्रामीणों की उम्मीदें निराशा में बदल गईं। शिविर में मुख्य विभागों के उच्च अधिकारी अनुपस्थित रहे और पूरी व्यवस्था को निचले स्तर के कर्मचारियों के भरोसे छोड़ दिया गया था। जो गिने-चुने प्रशासनिक अधिकारी पहुंचे भी, वे समस्याओं को सुनने और उनका ऑन-द-स्पॉट समाधान करने के बजाय केवल शिविर की औपचारिकताओं, निरीक्षण के नाम पर फोटो-सेशन और अपने आला अधिकारियों को कागजी रिपोर्ट भेजने में व्यस्त दिखे।

वाहवाही लूटने की होड़ और जमीनी हकीकत
शिविर में मौजूद ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि प्रशासन ‘जन सेतु संकल्प योजना’ के माध्यम से वास्तविक जनकल्याण करने के बजाय केवल सरकारी प्रचार और अपनी झूठी वाहवाही बटोरने में लगा है। मंच से बड़े-बड़े दावे किए जा रहे थे कि योजना से शासन और जनता के बीच की दूरी खत्म हो गई है, जबकि हकीकत कुछ और बया नजर आए
दूरी और समय का नुकसान उठाकर आए ग्रामीणों का कहना था कि जब अधिकारियों को केवल आवेदन जमा करके व वापस जिला मुख्यालय ही भेजना था, तो ऐसे बड़े-बड़े शिविरों के ढोंग की क्या आवश्यकता थी?
मूलभूत सुविधाओं का अभाव और आक्रोश
शिविर स्थल पर अव्यवस्था का आलम यह था कि दूर-दराज से पहुंची महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बैठने तक की उचित व्यवस्था नहीं थी। भीषण गर्मी में पीने के पानी और छाया के अभाव के कारण कई बुजुर्ग घंटों कतार में खड़े-खड़े पस्त नजर आए।
जब दोपहर बाद तक एक भी गंभीर समस्या का ठोस समाधान नहीं निकला, तो ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। स्थानीय ग्रामीणों और किसान प्रतिनिधियों ने शिविर स्थल पर ही प्रशासनिक लापरवाही के खिलाफ तीखा आक्रोश व्यक्त किया।




