अमित दुबे की रिपोर्ट
मल्हार: ऐतिहासिक नगरी मल्हार में आयोजित मल्हार महोत्सव 2026 इस बार जहां एक ओर सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के कारण चर्चा में रहा, वहीं दूसरी ओर अव्यवस्थाओं, सीमित आयोजन और राजनीतिक खींचतान के कारण सवालों के घेरे में भी आ गया। लगभग 8 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित इस महोत्सव से क्षेत्रवासियों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन आयोजन का स्वरूप अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतर सका।
दो दिन में सिमटा महोत्सव, जनता में नाराजगी
हर वर्ष तीन दिनों तक चलने वाला यह महोत्सव इस बार 28 और 29 मार्च को मात्र दो दिनों में ही संपन्न कर दिया गया। इससे न केवल कार्यक्रमों की संख्या कम हुई, बल्कि स्थानीय कलाकारों और दर्शकों को भी सीमित अवसर मिला।
राजनीतिक विवाद बना मुख्य कारण
स्थानीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी के नेताओं के बीच आपसी मतभेद इस आयोजन पर साफ नजर आए। सूत्रों के अनुसार, इन्हीं विवादों के चलते प्रशासन को आयोजन की कमान अपने हाथ में लेनी पड़ी।
मुख्य अतिथि और अध्यक्ष के रूप में नामित वरिष्ठ नेताओं की व्यस्तता के कारण उनके शामिल होने की संभावना भी कम हो गई, जिससे आयोजन का राजनीतिक और सामाजिक महत्व भी प्रभावित हुआ।
प्रशासन ने संभाली कमान
व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए प्रशासन ने एडीएम शिवकुमार बनर्जी को संयोजक और मस्तूरी एसडीएम को नोडल अधिकारी नियुक्त किया। हालांकि प्रशासनिक नियंत्रण के बावजूद आयोजन में वह भव्यता नहीं दिखी, जिसकी अपेक्षा की जा रही थी।
इतिहास और पहचान पर पड़ा असर
साल 1986 में शुरू हुआ मल्हार महोत्सव क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का प्रमुख हिस्सा रहा है। यह महोत्सव न केवल स्थानीय परंपराओं को मंच देता रहा है, बल्कि इसे राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की भी मांग लंबे समय से उठती रही है।
लेकिन इस बार के आयोजन ने इस विरासत को आगे बढ़ाने के बजाय सीमित कर दिया।
सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए, लेकिन स्तर रहा साधारण
मेला ग्राउंड में करमा, डंडा और पंथी जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं।
स्थानीय और क्षेत्रीय कलाकारों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया, जिसमें नितिन दुबे और सुनील सोनी जैसे कलाकार शामिल रहे।
इसके बावजूद मंच, साउंड सिस्टम और समग्र प्रस्तुति का स्तर अपेक्षाकृत साधारण रहा, जिससे दर्शकों को अपेक्षित अनुभव नहीं मिल पाया।
₹20 लाख के बजट पर उठे सवाल
इस बार महोत्सव के लिए लगभग ₹20 लाख का बजट निर्धारित किया गया था। इतनी बड़ी राशि के बावजूद
छोटा मंच और सीमित साज-सज्जा
कार्यक्रमों की कम संख्या
राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों का अभाव
प्रचार-प्रसार की कमी
जैसी बातें सामने आईं, जो संसाधनों के उचित उपयोग पर सवाल खड़े करती हैं।
क्या हो सकता था बेहतर?
विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि इस बजट में—
राष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध कलाकारों को आमंत्रित किया जा सकता था
भव्य मंच और लाइटिंग की व्यवस्था की जा सकती थी
तीन से चार दिवसीय विस्तृत कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते थे
पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रचार अभियान चलाया जा सकता था
स्थानीय शिल्प, व्यंजन और कला प्रदर्शनी को बड़े स्तर पर जोड़ा जा सकता था
जनता की अपेक्षा और प्रशासन के लिए संदेश
मल्हार की जनता चाहती है कि आने वाले वर्षों में इस महोत्सव को राजनीतिक विवादों से दूर रखते हुए एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में विकसित किया जाए।
यदि सही योजना, पारदर्शिता और समन्वय के साथ आयोजन किया जाए, तो मल्हार महोत्सव न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश में एक प्रमुख सांस्कृतिक पहचान बना सकता है।
निष्कर्ष
मल्हार महोत्सव 2026 ने यह स्पष्ट कर दिया कि केवल बजट पर्याप्त नहीं होता, बल्कि उसके सही उपयोग, दूरदर्शी योजना और समन्वय की भी उतनी ही आवश्यकता होती है।
आने वाले समय में यदि इन कमियों से सीख ली जाए, तो यह महोत्सव अपनी पुरानी गरिमा को फिर से प्राप्त कर सकता है।




