सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
नारायणपुर : गोंडवाना समाज जिला नारायणपुर के बखरूपारा स्थित सामाजिक परिसर में आज पारंपरिक रीति-रिवाज, अटूट सामाजिक आस्था और अद्वितीय हर्षोल्लास के साथ जिलास्तरीय “गायता जोहारनी” कार्यक्रम का गरिमामय एवं भव्य आयोजन संपन्न हुआ। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ आदिवासी संस्कृति के अनुसार देवी-देवताओं की विशेष पूजा-अर्चना और सेवा-अर्जी कर सुख-समृद्धि के आशीर्वाद के साथ किया गया।
प्रमुख अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में बस्तर लोकसभा सांसद माननीय महेश कश्यप उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथियों में श्री रूपसाय सलाम संरक्षण व लघु वनोपज प्रदेश अध्यक्ष, श्री नारायण मरकाम जिला पंचायत अध्यक्ष, श्री सदाराम ठाकुर सर्व आदिवासी समाज जिलाध्यक्ष और कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे रजऊ उसेण्डी गोंडवाना समाज जिला अध्यक्ष शामिल हुए।परंपरा के अनुरूप सभी अतिथियों का तिलक लगाकर, पगड़ी बांधकर और पारंपरिक गमछा भेंट कर आत्मीय स्वागत किया गया।
सदियों पुरानी गौरवशाली परंपरा का निर्वहन
आदिवासी गोंडवाना समाज में “गायता” का स्थान सर्वोपरि और अत्यंत आदरणीय होता है, जो समाज के पारंपरिक, धार्मिक और सामाजिक मार्गदर्शक हैं। समाज की प्राचीन रूढ़िवादी व्यवस्था के अनुसार, खेतों में नई फसल पकने के बाद सबसे पहले “नवाखाई” नया अन्न ग्रहण करने का पर्व मनाया जाता है। नवाखाई संपन्न होने के बाद “गायता जोहारनी” की सदियों पुरानी गौरवशाली परंपरा निभाई जाती है। इसी कड़ी में नारायणपुर जिले के 7 परगना—दुग्गल परगना, बारानाहक परगना, करंगाल परगना, 84 परगना और बेनूर परगना—से हजारों की संख्या में आदिवासी भाई-बहनों ने एकजुट होकर सामूहिक रूप से अपने ‘गायता’ के प्रति सम्मान, अटूट निष्ठा और कृतज्ञता प्रकट करते हुए उन्हें “जोहार” (अभिवादन) किया।
सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर मंथन और भावी रूपरेखा
कार्यक्रम में एकत्रित समाज के प्रबुद्ध जनों और ग्रामीणों ने वर्तमान सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों पर गहन विचार-विमर्श किया। इस दौरान समाज के समग्र कल्याण, अधिकारों के संरक्षण और उन्नति की भावी रूपरेखा तैयार की गई।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां, बंटा पारंपरिक चिवड़ा और गुड़ का प्रसाद
“गायता जोहारनी” का स्थानीय जनजीवन और बस्तर के आदिवासी समाज से गहरा आत्मीय व आध्यात्मिक संबंध है। कार्यक्रम के दौरान मांदर की गूंजती थाप, रेला और हुलकी नृत्य तथा नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा घोटुल पाटा की मनमोहक प्रस्तुति ने समां बांध दिया। इस दृश्य ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आदिवासी संस्कृति ही बस्तर की असली पहचान है और सामाजिक एकजुटता ही इसकी सबसे बड़ी शक्ति है। आपसी भाईचारे और सामूहिक समरसता को सुदृढ़ करने के लिए उपस्थित अतिथियों और दूर-दराज से आए हजारों ग्रामीणों को नए अन्न से तैयार चिवड़ा और गुड़ का पारंपरिक महाप्रसाद वितरित किया गया।
इनकी रही प्रमुख उपस्थिति
कार्यक्रम में सर्व समाज व गोंडवाना समाज के पदाधिकारियों, परगना माझी, परगना अध्यक्षों, गायता, पटेल, विभिन्न जनप्रतिनिधियों सहित नगरपालिका अध्यक्ष श्री इंद्र प्रसाद बघेल, जनपद अध्यक्ष श्रीमती पिंकी उसेण्डी, मोड़ा राम कवड़ो, जागेश्वर उसेण्डी, मोती राम वड्डे, राजमन मंडावी, साधूराम पोटाई, रतन सलाम, रामसिंह मंडावी, मंगऊ राम कावड़े, हरेकृष्ण गार्डी, नरेश पट्टावी, फगनू सलाम, संतनाथ उसेण्डी, प्रेमलाल नाग, राजू राम दुग्गा, लखन मंडावी, लछु करंगा, चैतराम कुमेटी, राकेश कावड़े, परमेश उईके, सोनसिंग कोर्राम, पुलधर कचलाम, लखन नुरेटी, सुकमू करंगा, बुधराम वड्डे, सुंदर नाग, कमलेश नाग, गोपाल दुग्गा, प्रभुलाल दुग्गा, सुखमन कचलाम, सुखमन उइके, राकेश उसेण्डी, मंगतू पोटाई, रत्ती कोर्राम, जयराम गावड़े, जयलाल, सोमधर मंडावी, जयराम कोरोम, जंगलूराम सलाम, सुकलु, लखमु हिचामी, जयलाल मंडावी, सिंगलु दुग्गा, लच्छूराम दुग्गा, सुखमन कोर्राम, उमेश कर्मा, तिजाय कुमेटी, अनिता कोरेटी, सविता उसेण्डी, देवली पोटाई, संतोषी कुमेटी, संगीता ध्रुव, कोता गार्डी, मंगली कावड़े, रानो पोटाई, नमिता कुमेटी, सुनिता कोड़ो, सतन्ती उसेण्डी, श्रीमती रेखा सलाम, अनूप कुमेटी, तिजाउ कावड़े, सुधराम उसेण्डी, राजा कुमेटी, मीना भास्कर, सुखयारी सलाम, देवी कुमेटी, सुश्री रामदाय सलाम सहित बड़ी संख्या में सामाजिक जन उपस्थित थे।




