जबलपुर | जबलपुर मध्यप्रदेश सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय राजमार्गों के अतिक्रमण हटाने के प्रयासों से असन्तुष्टि जाहिर की है। केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय को निर्देश दिए कि एक माह के अंदर सभी राष्ट्रीय राजमार्गों के लगातार और नियमित निरीक्षण के लिए उचित टीमों का गठन किया जाए। ताकि यह पता लगाया जा सके कि कहीं अतिक्रमण तो नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश 30 सितम्बर तक केंद्र सरकार पेश करे ब्यौरा, सरकार बनाए टीम
जस्टिस अभय एस ओक व जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि प्रत्येक टीम को अलग-अलग राजमार्गों के एक विशेष खंड के लिए जिम्मेदार बनाया जाए। यह सुनिश्चित करने के लिए एक तंत्र बनाया जाना चाहिए कि निरीक्षण दल अतिक्रमण पाए जाने पर तुरंत अतिक्रमण हटाने के लिए अधिकृत सक्षम प्राधिकारी को रिपोर्ट करें।
जबलपुर के रिटायर्ड इंजीनियर ने लगाई है जनहित याचिका
जबलपुर निवासी सेवानिवृत्त अभियंता ज्ञानप्रकाश खरे द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुरवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिए कि 30 सितम्बर तक मंत्रालय एक पोर्टल भी विकसित करेगा। जहां नागरिक राजमार्गों पर अतिक्रमण के बारे में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। पोर्टल पर नागरिकों को अतिक्रमित हिस्सों की तस्वीरें और स्थान का विवरण अपलोड करने में सक्षम होना चाहिए। इसके अलावा, अतिक्रमण की सूचना देने के लिए एक टोल फ्री नंबर की सुविधा भी बनाई जानी चाहिए।
राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण को रोकना
एमिकस क्यूरी स्वाति घिल्डियाल ने कोर्ट को बताया कि भारत सरकार के सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा 18 मार्च, 2024 को एक परिपत्र जारी किया गया है। उनकी चिंता यह है कि यदि राष्ट्रीय राजमार्गों पर अतिक्रमण को रोकना और हटाना है, तो राजमार्गों के नियमित निरीक्षण के लिए उचित निरीक्षण टीमों का गठन किया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि परिपत्र में निर्धारित निरीक्षण आवृत्ति वही है जो हाइवेज के निर्माण चरण में निर्धारित की गई थी।सर्वोच्च कोर्ट ने इस परिपत्र के सम्बन्ध में कहा कि यह काम नही करेगा।
सुको की समिति को भेजो आदेश
कोर्ट ने कहा कि शिकायतों के आधार पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। मंत्रालय को सभी राष्ट्रीय राजमार्गों और मीडिया में सुविधा पोर्टल और टोल-फ्री नंबर की उपलब्धता के बारे में व्यापक प्रचार करना भी आवश्यक है । स्पष्ट किया गया कि उपलब्ध कराई गई व्यवस्था को राज्य राजमार्गों तक विस्तारित किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि इस न्यायालय द्वारा सडक़ सुरक्षा के मुद्दे से निपटने के लिए एक समिति गठित की गई है, जिसके अध्यक्ष जस्टिस अभय सप्रे हैं। राजमार्गों पर अतिक्रमण का मुद्दा सडक़ सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इसलिए, इस आदेश की एक प्रति और इसके बाद पारित होने वाले आदेशों की प्रतियां उक्त समिति को भेजी जाएं ।



