अमित दुबे की रिपोर्ट:-
कोटा। क्षेत्र के छेरकाबांधा ग्राम के किसानों ने आज अपनी गंभीर समस्याओं को लेकर सामूहिक रूप से कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने आरोप लगाया कि इस वर्ष उनकी भूमि की गिरदावली से नाम बिना किसी सूचना के हटा दिए गए हैं और शासन द्वारा चलाए जा रहे धान खरीदी पंजीयन में भी उनके नाम शामिल नहीं किए गए हैं। इस कारण उन्हें सरकारी समर्थन मूल्य पर अपनी उपज बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

ज्ञापन सौंपने के दौरान क्षेत्रीय विधायक अटल श्रीवास्तव भी किसानों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि वास्तविक किसानों के नाम गिरदावली से हटा दिए गए हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि तुरंत जांच कर किसानों के नाम पुनः दर्ज किए जाएं और जिन किसानों का पंजीयन नहीं हुआ है, उनका विशेष अभियान चलाकर शीघ्र पंजीयन कराया जाए।

किसानों ने बताया कि पिछले कई वर्षों से वे उक्त भूमि पर खेती कर रहे हैं, फिर भी राजस्व अभिलेखों में उनके नामों को हटाकर अन्य लोगों के नाम दर्ज कर दिए गए हैं। कई किसानों ने कहा कि वे हर साल समय पर फसल बोते हैं, टैक्स और ऋण भी चुकाते हैं, लेकिन अब अचानक नाम कट जाने से वे सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं।
इस अवसर पर विधायक अटल श्रीवास्तव ने कहा कि किसानों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी प्रभावित किसानों की सूची बनाकर जल्द से जल्द जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि मामले का त्वरित समाधान नहीं हुआ तो वे विधानसभा में भी इस विषय को उठाएंगे।
कलेक्टर ने ज्ञापन प्राप्त करते हुए किसानों को आश्वासन दिया कि संबंधित विभागों को तत्काल निर्देश जारी किए जाएंगे और उचित जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से रामसिंह पटेल, धर्मराज यादव, हेमलाल साहू, चंद्रभूषण कश्यप, भोलाराम मरकाम, सुरेश साहू, हरिशंकर पटेल आदि शामिल थे। किसानों ने कहा कि वे प्रशासन के सकारात्मक कदम की प्रतीक्षा करेंगे, लेकिन यदि समस्या का समाधान जल्द नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने पर विवश होंगे।
इस घटनाक्रम से क्षेत्र के किसानों में गहरा आक्रोश व्याप्त है और सभी की निगाहें अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।



