अमित दुबे की रिपोर्ट:-
रतनपुर।धार्मिक व पौराणिक नगर रतनपुर के बहुचर्चित श्री गणेश टॉकीज परिसर की 52 डिसमिल भूमि को लेकर राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। खसरा नंबर 3604/3 की उक्त भूमि का एक हिस्सा स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल के नाम दर्ज था, जबकि शेष भूमि विमल, विवेक एवं विनीत जायसवाल के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज बताई जाती है।
मामला उस समय तूल पकड़ गया जब स्वर्गीय मोतीचंद जायसवाल के नाम दर्ज भूमि को हटाकर कथित रूप से अन्य खातेदारों के नाम नामांतरण कर दिया गया। चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि तहसील रतनपुर द्वारा नामांतरण संबंधी दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि 7 जनवरी निर्धारित की गई थी, लेकिन आरोप है कि इसके एक दिन पहले ही, यानी 6 जनवरी को नामांतरण आदेश पारित कर दिए गए।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि दावा-आपत्ति की अवधि पूर्ण होने से पहले आदेश पारित करना न केवल राजस्व नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है, बल्कि इससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न लगते हैं। उनका आरोप है कि यदि दावा-आपत्ति की वैधानिक अवधि का पालन किया जाता, तो तथ्य सामने आ सकते थे और वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती थी।

इस पूरे प्रकरण को लेकर पीड़ितों ने रतनपुर थाना, कोटा एसडीएम, बिलासपुर कलेक्टर सहित प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव को लिखित शिकायत सौंपते हुए उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि नामांतरण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी कर एकतरफा कार्रवाई की गई।
मामले में तत्कालीन तहसीलदार शिल्पा भगत की भूमिका को लेकर नगर में तीखी चर्चाओं का दौर जारी है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है जब उनके कार्यकाल में विवादित निर्णय सामने आए हों। पूर्व पदस्थापना के दौरान भी तथाकथित शनिचरी कांड, सड़क चौड़ीकरण के नाम पर डेंजर जोन घोषित कर भूमि पर कब्जा दिलाने तथा एकतरफा कार्रवाई जैसे आरोप लगते रहे हैं।
नगरवासियों का आरोप है कि राजस्व मामलों में दस्तावेजों की अनदेखी, जल्दबाजी में लिए गए फैसले और पक्षपातपूर्ण रवैया अब चिंता का विषय बन चुका है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो आम नागरिकों का प्रशासन से विश्वास उठना स्वाभाविक है।
पीड़ित पक्ष की ओर से शीतल जायसवाल ने बताया कि श्री गणेश टॉकीज भूमि प्रकरण के बाद नगर में आक्रोश का माहौल है। विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संघों एवं जागरूक नागरिकों ने एकजुट होकर चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो नगर स्तर पर व्यापक आंदोलन छेड़ा जाएगा।
फिलहाल यह प्रकरण न केवल एक भूमि विवाद तक सीमित रह गया है, बल्कि राजस्व प्रशासन की कार्यशैली और जवाबदेही पर भी बड़ा सवाल बनकर उभर रहा है। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और उच्च स्तरीय जांच के निर्णय पर टिकी हुई हैं।



