अमित दुबे की रिपोर्ट :-
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। मेहनत, आत्मविश्वास और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के सहयोग से जीवन की दिशा कैसे बदली जा सकती है,
इसका प्रेरणादायक उदाहरण गौरेला विकासखंड के ग्राम पंचायत सधवानी की श्रीमती बृहस्पति धुर्वे हैं। कभी दूसरों के खेतों में मजदूरी कर परिवार का गुजारा करने वाली बृहस्पति धुर्वे आज अपने क्षेत्र में “लखपति दीदी” के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने न केवल खुद को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया, बल्कि अपने गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की मिसाल बन गई हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन में संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) से जुड़कर बृहस्पति धुर्वे ने अपने जीवन में बदलाव की शुरुआत की।
महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें प्रशिक्षण और आर्थिक सहयोग प्राप्त हुआ, जिससे उन्होंने ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का कार्य शुरू किया। शुरुआत में उन्होंने यह काम छोटे स्तर पर शुरू किया, लेकिन मेहनत, लगन और निरंतर प्रयासों के बल पर धीरे-धीरे उनका उत्पादन बढ़ता गया और आय के नए रास्ते खुलते गए।
मशरूम उत्पादन के साथ ही उन्होंने सब्जी-भाजी की खेती भी शुरू की। इन दोनों कार्यों से आज उनकी वार्षिक आय लगभग डेढ़ से दो लाख रुपए तक पहुंच चुकी है। इससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया है और अब वह आत्मविश्वास के साथ अपने परिवार की जरूरतों को पूरा कर रही हैं।

बृहस्पति धुर्वे बताती हैं कि शासन की विभिन्न योजनाओं से भी उन्हें काफी लाभ मिला है। उन्हें महतारी वंदन योजना के तहत आर्थिक सहायता, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से रसोई गैस कनेक्शन, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्का मकान तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) से 35 किलो निःशुल्क चावल की सुविधा प्राप्त हो रही है। इन योजनाओं ने उनके परिवार को आर्थिक सुरक्षा और स्थिरता प्रदान की है।
आज बृहस्पति धुर्वे केवल स्वयं ही आत्मनिर्भर नहीं बनी हैं, बल्कि अपने अनुभवों को साझा कर आसपास की महिलाओं को भी प्रेरित कर रही हैं। वह गांव और आसपास के क्षेत्रों की महिलाओं को मशरूम उत्पादन का प्रशिक्षण देती हैं और उन्हें स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रोत्साहित करती हैं, जिससे अन्य महिलाएं भी आर्थिक रूप से सशक्त बन सकें।
महिला स्व-सहायता समूह के माध्यम से ऋण प्राप्त कर उन्होंने अपने उत्पादों के विक्रय के लिए एक छोटी दुकान भी बनवाई है। भविष्य में इस दुकान के माध्यम से वह मशरूम और अन्य कृषि उत्पादों की बिक्री कर अपनी आय को और बढ़ाने की योजना बना रही हैं।
बृहस्पति धुर्वे की यह सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि कड़ी मेहनत, सही मार्गदर्शन और शासन की योजनाओं का सहयोग मिल जाए, तो साधारण परिस्थितियों से निकलकर भी कोई व्यक्ति सफलता और आत्मनिर्भरता की नई ऊँचाइयों तक पहुंच सकता है।
उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय बन गई



