अमित दुबे की रिपोर्ट:-
बिलासपुर| रतनपुर रानी बछाली, कोटा, शासकीय विद्यालय में कार्यरत शिक्षक प्रमोद कुमार साहू, जो वर्तमान में समन्वयक पद पर पदस्थ हैं, पर गंभीर आरोप लगे हैं। मिली जानकारी के अनुसार साहू ना तो अपंग हैं और ना ही आर्थिक रूप से गरीब, इसके बावजूद उन्होंने शासन की विकलांग पेंशन योजना और “महतारी योजना” जैसे सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ उठाया है।
यह सनसनीखेज खुलासा एक आरटीआई (सूचना के अधिकार) आवेदन के माध्यम से हुआ है, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि प्रमोद साहू को वर्षों से विकलांग पेंशन मिल रही थी, जबकि वह किसी भी तरह का विकलांग नहीं है।
‘महतारी योजना’ का भी लाभ गलत तरीके से लिया
इसके अलावा प्रमोद कुमार साहू ने छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी योजना, जो खासकर गरीब महिलाओं और माताओं के लिए आरक्षित है, का भी लाभ अपनी पत्नी के नाम से लिया है, जबकि उनके नाम से संपत्ति और नियमित शिक्षक के रूप में वेतन प्राप्त हो रहा है।
जारी किया गया नोटिस, पर कार्रवाई केवल औपचारिक
इस गंभीर अनियमितता के सामने आने के बाद संबंधित विभाग ने प्रमोद कुमार साहू को कारण बताओ नोटिस जारी किया है, लेकिन वह केवल औपचारिक प्रतीत हो रहा है। अब तक न तो भत्ते की रिकवरी की कोई ठोस प्रक्रिया शुरू हुई है और न ही विभागीय जांच में कोई सख्त कदम उठाया गया है।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
इस पूरे मामले पर स्थानीय लोगों और शिक्षकों में रोष है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि एक सरकारी शिक्षक, जो जिम्मेदारी के पद पर कार्यरत है, यदि इस तरह योजनाओं का दुरुपयोग करता है तो गरीब और जरूरतमंद लोगों का क्या होगा?
जनता ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और दोषी शिक्षक पर कठोर कार्रवाई की मांग की है, ताकि सरकारी योजनाओं के दुरुपयोग पर लगाम लग सके और भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति इस प्रकार की धोखाधड़ी करने का साहस न कर सके l



