सुरेश सोनी की रिपोर्ट :-
नारायणपुर :नारायणपुर कोंडागांव जिले की सीमा में स्थित ग्राम राजबेड़ा में 100 साल से भी अधिक पुरानी प्राचीन मूर्ति भगवान गणेश और दुर्गा जी की है, आदिवासी समुदाय के लिए ये एक आस्था केंद्र है, गांव वालों का मानना है कि इन मूर्तियो का आकार दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, राजबेड़ा का मंदिर अपनी पहचान से जूझ रहा है ,शासन प्रशासन की अनदेखी के चक्कर में ,गांव वाले अपने चंदे पैसे को इकट्ठा कर इस मंदिर को बनवाए हैं, अब तक इनको किसी भी तरह से सरकारी मदद नहीं मिली है, इन मूर्तियों का संरक्षण यहां के स्थानीय ग्रामीण ही कर रहे हैं, यहां सोमवार को पूजा अर्चना की जाती है,
ग्रामीणों का मानना है कि यहां पर संतान प्राप्ति की मनोकामना पूर्ण होती है, इसके अच्छे रख रखाव के लिए गांव वालों ने कई बार जनप्रतिनिधियों अधिकारियों को ज्ञापन एवं मौखिक रूप से सूचना दी पर आज तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई, राजबेड़ा मंदिर पहुंचने के लिए जिला मुख्यालय नारायणपुर से दंडवन होते हुए लगभग 30 किलोमीटर दूरी तय करना पड़ता है, पीढ़ी दर पीढ़ी इस मूर्ति की पूजा गांव वालों के द्वारा की जा रही
है,गांव वालों को कहना है कि कुछ सदियों पहले हर एक यह क्षेत्र एक बस्तर जिला होता था जब इसकी सूचना तहसीलदार को पड़ी तो उन्होंने इस मूर्ति को कोंडागांव लाने का आदेश दिया, ले जाते वक्त बैलगाड़ी से के पहिए टूट गए , गाड़ी कीचड़ में फंस गई बड़ी मुश्किल से इसको गांव से ले जाया जा रहा था पर वे असफल रहे, बाद वहां अनहोनी घटना होनी चालू हो गई , लोग बीमार पड़ने लगे,तहसीलदार का बेटा अकाल मृत्यु से खत्म हो गया,
तत्पश्चात तहसीलदार ने वापस मूर्ति को राजबेड़ा ले जाने का आदेश दिया था, गणेश चतुर्थी में श्रद्धालुओं का यहां अभी आ जाना लगा रहता है, आसपास के इलाकों का यह एक आस्था का प्रमुख केंद्र है,




