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गौठानो में जडी बूटी दवा वितरण किया गया घर घर पूजा अर्चना और गेढ़ी का लिया आनंद।
बुलंद टाइम्स न्यूज, गरियाबंद। तहसील मुख्यालय मैनपुर सहित ग्रामीण अचंल में पारंपरिक हरेली पर्व बड़े उत्साह के साथ धूमधाम से मनाया गया, हरेली का त्यौहार मूलतः किसानो का त्यौहार माना जाता है हरेली के दिन किसानों ने अपने कृषि यंत्रो को धो मांज कर पूजा किया और फसल की अच्छी पैदावार के लिए देवी-देवताओं से कामना किया गया, सावन मे जल जनित बिमारियों कें रोकथाम के लिए गांव के देवी-देवताओं की पूजा अर्चना कर निवेदन किया गया और गेंड़ी चलाकर उत्सव मनायें, वर्ष का यह प्रथम त्यौहार है यह त्यौहार हरियाली एवं खुशी का प्रतीक है तथा ग्रामीण अंचलों में हरेली के पर्व पर घरो के बाहर गोबर से विभिन्न आकृतियां बनाई जाती है इसके पिछे मान्यता यह है कि इसे जादू टोना का असर नही होता है और परिवार के सदस्य सुरक्षित रहते है, धार्मिक परंपराओं के अनुसार हरेली अमावस्या के दिन गांव के झांकर, पुजारी और रावत घर घर जाकर भेंलवा का डगांल घर के ओरछा में लगाते हैं, हरेली त्यौहार का परंपरागत शुभारंभ दिन केे निकलने के साथ ही शुरू हो जाता है, सुबह पशु पालक किसान धान लेकर गांव के झांकर व चरवाहे से दशमूल कंद दवाई लाकर अपने मवेशी को निरोगी होने के लिए खिलाते है एवं इस दिन किसान अपने कृषि यंत्रों की साफ-सफाई कर विधीवत् पूजा अर्चना करते चावल आटे से बनी चीला रोटी का भोग लगाते है। किसान भेलवां का डगंाल लेकर खेतो मे पूजा अर्चना करते है जिससे उनका मानना है कि खेतो मे किसी प्रकार कीट व्याधियो का प्रकोप नही रहता वही घरों मे चावल आटे का चिला बनाकर इसका भगवान को भोग लगाया जाता है। पशुओं कों गेंहु आटे की बनी लोई खिलाई जाती है एवं चरवाहे दशमूल और अन्य औषधि फल प्रसाद के रूप में किसानो को दिया जाता हैं ताकि वह अपने मवेशियों को खिलाने के लिए यह औषधि बहुत गुण कारी है, इस आशय से किसान बंधु अपने मवेशियों को यह औषधि देते है। वही ग्रामीण इलाको मे बच्चो व युवाओ ने बांस की बनी गेढ़ी चढ़कर जमकर आनंद लिया।




